लॉक डाउन में बेजुवान का खयाल रकेह रहे युवा

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समस्तीपुर से ब्यूरो रिपोर्ट अंशु कुमार 

युवाओं में उमङा दया का भाव, लाॅकडाउन में 

बेजुबानों के लिए करने लगे भोजन की व्यवस्था 

 बेजुबानों के जीने का सहारा बनीं यूथ बिग्रेड टीम।

 सेव स्पीचलेस कैम्पेन के जरिए जारी है बेजुबानों को बचाने की मुहिम।

 समस्तीपुर । कहते हैं कि जब समाज में विपदा आती है तो लोगों के दिलों में संवेदनायें स्वतः ही जागृत हो जाती हैं। ऐसा ही नजारा जिले के विद्यापतिनगर में देखने को उस समय मिला, जब लॉकडाउन में बेजुबानों को भूख-प्यास से तड़पते देख युवाओं के भीतर की संवेदनाओं को जगा दिया और युवाओं ने इन बेजुबानों को भोजन की व्यवस्था शुरू कर दी।

 यूथ बिग्रेड टीम ने उठाया बीड़ा

कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन में आम आदमी को विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा वहीं बेजुबान जानवर भी भोजन के लिए इधर-उधर भटकने को मजबूर हो गए हैं। गरीबों व असहाय लोगों के लिए जहां यूथ बिग्रेड टीम ज़रूरतमंदों के बीच  खाद्य सामग्री व अन्य जरूरत का सामान उपलब्ध कराने में पहले से ही जुटे थीं । वहीं बेजुबान जानवरों को भोजन उपलब्ध नहीं होता व  इनको भूख से बिलबिलाते व तङपता देख यूथ बिग्रेड के संयोजक पदमाकर सिंह लाला के नेतृत्व में टीम से जुङे चंदन कुमार भोला,मो.एहसान,मो.इंतजार, अध्यक्ष राकेश कुमार उर्फ मैनेजर साह,संतोष

साह,मो.शमशेर,मो.अज़हर,राकेश साह,कन्हैया दास , प्रिंस शर्मा आदि युवाओं के मन में पीङा हुई तो भोजन-पानी की व्यवस्था शुरू कर दी। इन अनसीन हीरो ने इसके लिए बकायदा ” सेव स्पीचलेस” कैम्पेन भी  शुरू किया है।इनकी पहल का असर है कि दर्जनों युवा को इन बेजुबानों की चिंता सताने लगी है।वे अल सुबह व रात्रि में चुपके से इन बेजुबानों के पास जाते हैं और इनको निवाला खिलाकर अपने-अपने घर लौट जाते हैं।

बताते चलें कि वैश्विक महामारी कोरोना को लेकर बिहार में लॉकडाउन लागू है। तकरीबन 19 दिन से लोग अपने-अपने घरों मे बंद हैं, काम धंधा ठप है। हालांकि भूखे गरीब-गुरबों की चिंता सरकार को है। उन्हें भोजन मुहैया कराने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। अलबत्ता लोग अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। सभी लोग अपने घरों में कैद हैं। ऐसी स्थिति ये बेजुबान अपना पेट भरने के लिए कहां जाएंगे और कहां पर जाकर रोटी की तलाश करेंगे। इस संकट की घड़ी में इनका पेट भरना ओर भी अहम हो जाता है। 

परंतु होटल के साथ-साथ ठेले,खोमचे तक बन्द हो जाने से सड़क पर विचरण करने वाले बेजुबानों के समक्ष भुखमरी की समस्या उत्पन्न हो गई है। 

बेजुबानों को भोजन करना पुण्य का काम  :: 

समाजसेवी पदमाकर लाला कहते हैं कि बेजुबानों के लिए लॉकडाउन में भोजन का कोई इंतजाम नहीं है, उनकी टीम के सदस्यों ने इसे पुण्य कार्य मानते हुए भोजन के इंतजाम करने में सहभागिता दिखाई है। यह कार्य लगातार किया जाएगा, उन्होंने युवाओं से आह्वान किया है कि इस तरह के कार्य में आगे आए, जिससे बेजुबान जानवरों को भोजन के लिए न भटकना पड़े। युवा सकारात्मक सोच के साथ आगे आए तो बेजुबान जानवर के बीच व्याप्त भोजन और पानी का संकट दूर कर सकते हैं।

  सेव स्पीचलेस कैम्पेन की पहल आई काम, दूसरे लोग भी खिलाने लगे खाना

सेव स्पीचलेस कैम्पेन के जरिए यूथ बिग्रेड टीम ने अभियान चलाया कि वह इन जानवरों को भोजन उपलब्ध कराएंगे। परिणाम सामने आया कि लोग निराश्रित जानवर को खाना खिलाने के लिए आगे आने लगे। कहते हैं कि यह वहीं जानवर हैं, जिनसे इंसान दूर भागता था। यही सोचता था कि उन पर जानवर हमला न कर दें। पर अब इंसान ने डरना छोड़ इन बेजुबानों की भूख की चिंता करने लगे । 

** युवाओं से अपील बचाएं बेजुबानों की जान

यूथ बिग्रेड टीम ने अपील की हैं कि वे अगर बाहर नहीं जा सकते हैं तो अपने घरों के बाहर तो गलियों में घूमने वाले बेजुबानों का सहारा बन हीं सकते हैं। उन्होंनें लोगों से अपील की हैं कि वे इस संकट की घड़ी में सतर्कता बरतें और अपना, अपने परिवार के सदस्यों का और साथ ही इन बेजुबानों का भी ख्याल रखें।

 कोरोना महामारी की वजह से बदलते परिवेश में सबकुछ बदलने लगा है। डिजिटल युग की भागमभाग जिंदगी में जब लॉकडाउन का ब्रेक लगा तो हर कोई अपने घरों में कैद हो कोरोना के संक्रमण से अपनी और परिवार की सुरक्षा को सर्वोपरि मानने लगे। ऐसे लोगों के बीच कुछ ऐसे लाेग भी थे जो खुद की फिक्र के साथ बेजुबानों के दर्द को भी महसूस करने में लगे हैं । न अपनी फिक्र न घर की चिंता, बस बेजुबानों के दर्द को दूर करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।