धान के कटोरे में मार्च माह के प्रथम पखवारे में मौसम में आए दिन परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कभी तेज धूप तो अचानक बदली छा रही है। दिन में तेज धूप व पछुआ हवा चलने से रबी की फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वहीं साग-सब्जियों पर भी बदले मौसम का विपरीत प्रभाव पड़ा है। इससे अन्नदाता चितित हैं। मौसम का हाल यही रहा तो गेहूं का उत्पादन प्रभावित होगा और अन्नदाताओं को आर्थिक क्षति उठानी पड़ेगी। दलहन-तिलहन की फसलें भी प्रभावित होंगी।
गेहूं की फसल में बालियां निकल गई हैं। फाल्गुन के महीने में इसमें दाना पड़कर मजबूत हो जाता है। इस समय पड़ने वाली तेज धूप व हवा इसके लिए बेहद नुकसान पहुंचाने वाली है। यदि खेत में पानी लग गया और हवा चल गई तो फसल गिरने की आशंका रहती है। गिरी हुई फसल में दाना कमजोर पड़ता है। इससे उत्पादकता पर असर पड़ता है। फाल्गुन का महीना गेहूं की फसल के लिए बेहद अहम होता है। इस माह में यदि प्राकृतिक आपदाओं से बचा जा सके तो उत्पादन अच्छा होने की पूरी उम्मीद रहती है, लेकिन शुरूआत में जिस तरह से मौसम में गर्मी बढ़ी है। इसका असर फसल पर उल्टा पड़ेगा। गर्मी की वजह से पानी की जरूरत ज्यादा रहती है। पानी लगाना भी इस समय बेहद कठिन होता है। पानी लगने के बाद यदि तेज हवा चली तो गेहूं की फसल गिर जाएगी। ऐसे में फसल के नष्ट होने की आशंका ज्यादा बढ़ जाती है।