बाल विवाह, बालश्रम को रोकने के लिए महिलाओं नें संभाली कमान

ग्राम पंचायत परौआ के लुधपुरा गांव में कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन्स फाउंडेशन (यू. एस ) के सहयोग से न्याय तक पहुंच फेज 2 कार्यक्रम में मंजरी फाउंडेशन के द्वारा बाल विवाह के खिलाफ एक रैली का का आयोजन किया गया | रैली को परुआ सरपंच दिव्या कुशवाहा नें हरी झंडी दिखा कर रवाना किया | रैली के दौरान बाल विवाह, उसके दुष्परिणाम और बचाव के संबंध में जानकारी दी गई।
इस प्रोग्राम की सी एस एम यशपाल नें इस कार्यक्रम के अंतर्गत होने वाली सभी गतिविधियों की जानकारी देते हुए कहा कि भारत में बाल विवाह बहुत बड़ी घरेलू ज़िम्मेदारियाँ लाद देता है, ख़ासकर मासूम बच्चियों पर जो इसके लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार नहीं होती हैं। जो लड़के अभी अवयस्क हैं उन्हें गंभीर आर्थिक जिम्मेदारियों और पूरे परिवार को वहन करने के लिए मजबूर किया जाता है। परुआ के सरपंच दिव्या कुशवाहा नें सभी को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाते हुए कहा कि भारत में बाल विवाह मासूम बचपन और इन बच्चों से खेलने और सीखने की आजादी छीन लेता है। यह दुष्ट अभ्यास एचआईवी जैसे यौन रोगों को अनुबंधित करने का एक बड़ा जोखिम पैदा करता है। बहुत कम उम्र में शादी करने वाली लड़कियों को गर्भावस्था और संबंधित विषयों के बारे में जानकारी होने की संभावना कम होती है। ऐसी मां से पैदा होने वाले बच्चे के कुपोषण जैसी बीमारियों से पीड़ित होने की संभावना अधिक होती है।
उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी देते हुए बताया कि अगर किसी तरह यह साबित हो जाता है कि शादी हो रहे लड़के और लड़की की उम्र 21 वर्ष से कम है तो लड़के को 2 साल की सजा और ₹100000 जुर्माना या दोनों हो सकता है। भारत सरकार ने इस सम्बन्ध में कठोर कानून बनाया है और लड़कियों का अठारह वर्ष से कम तथा लड़कों का इक्कीस वर्ष से कम आयु में विवाह करना कानूनन अपराध है । उन्होंने बाल विवाह की सूचना टोल फ्री नंबर 1800 102 7222 या 100 नंबर पर पुलिस को देने की अपील की | इस मौके पर हरप्यारी, मीरा, श्रीमती, रीना आदि उपस्थित थी |
रिपोर्टर वीरेंद्र सविता
बसई नवाब धौलपुर

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