R9.भारत टी.वी.
ब्यूरो चीफ सिंगरौली
अमित कुमार पाण्डेय
भाजपा के शासन में सिंगरौली जिले में बढा है पुलिसिया अत्याचार:- प्रवीण सिंह चौहान
सिंगरौली जिले में अक्सर दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिया अत्याचार पुराने तर्ज पर आज भी कायम है पुलिस के द्वारा कभी गुप्तांगों में डंडा डालना सुग्गा लाल बैस की घटना चाहे सरई में रामानंद प्रजापति द्वारा पुलिस की प्रताड़ना से तंग आकर के अग्नि दाह कर लेना थाना परिसर के अंदर या फिर हरिजन आदिवासियों को मारपीट कर आरोप दूसरे के सर पर लगा देना इस तरह की घटना सिंगरौली जिले में आम हो चुकी है इन सारी घटनाओं ने एक बार सिंगरौली की जनता के जख्म को फिर से कुरेद दिया है राज बहादुर की हत्या होने पर आज जब मैं राजबहादुर के घर उनके माता-पिता से मिलने पहुंचा तो उनके दुख और दर्द असहनीय थे एक तरफ जहां बिलखती हुई मां आंसुओं को पूछ रही थी दूसरी तरफ बहन बिलख कर रोते हुए बता रही थी कि जब भैया थाने से लौटकर आया दर्द से करा रहा था और पानी भी नहीं पी पा रहा था बहन ने कहा कि मैं खाना लेकर के गई और जब खिलाने लगी तो खाना भी नहीं खा सका पिता ने बिलखते हुए बताया कि मेरे सामने सरई पुलिस ने मुझे मां बहन की गाली देते हुए यह प्रश्न किया कि किस तरह का बच्चा पैदा किए हो और बाल खींच कर के थाने के अंदर से लेकर के आए एक आरोप में पुलिस स्वस्थ 20 साल के बच्चे को घर से उठाकर के ले जाती है और 4 घंटे बाद गंभीर हालत में बच्चे को उसके बाप को सुपुर्द किया जाता है और रात में उस लड़के की थाने मे हुई मारपीट के कारण मृत्यु हो जाती है आज के लोकतंत्र में इससे गंदी घटना क्या हो सकती है जो पुलिस हमारी सुरक्षा के लिए बनी है वह इस भारतीय जनता पार्टी की सरकार में इतनी निरंकुश हो चुकी है कि पैसे की भूख के कारण लोगों को मौत के घाट उतारने का काम कर रही है और सबसे कष्ट की बात यह है कि सिंगरौली जिले के जनप्रतिनिधि जो कहीं ना कहीं अधिकारी तंत्र के गुलाम हैं वह मौन धारण किए हुए बैठे हैं लड़के की मृत्यु के उपरांत पुलिस लगातार दाह संस्कार के लिए दबाव बनाती रही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने दबाव बनाते हुए पोस्टमार्टम कराया उसके उपरांत दाह संस्कार के लिए मृतक के पिता द्वारा बताया गया कि ₹50000 तहसीलदार एवं ₹50000 टीआई सरई के द्वारा सहयोग किया गया जिस तरह से पुलिस इसे साधारण मृत्यु मानकर केस को रफा-दफा करने का प्रयास कर रही है सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि यदि मृत्यु साधारण थी तो फिर किस निधी के तहत यह पैसा दिया गया अपने आप में एक प्रश्न चिन्ह है कहीं ना कहीं कुर्सी बचाने की कवायद है प्रशासनिक अधिकारियों की एक आदिवासी परिवार के बच्चे की हत्या कर दी जाती है पुलिस के द्वारा और कार्यवाही के नाम पर चंद्र पुलिसकर्मियों को मात्र सस्पेंड कर खानापूर्ति करने का कार्य किया गया भारतीय जनता पार्टी के विधायक जब थाना चलाएंगे तो कहीं न कहीं जनता को यह तकलीफ झेलनी पड़ेगी और आज की स्थिति में सिंगरौली जिले में भारतीय जनता पार्टी के विधायक ही थाना में ट्रांसफर पोस्टिंग करा रहे हैं और अपनी चला रहे हैं सिंगरौली की जनता को इस बात को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है । यदि पुलिस प्रशासन के द्वारा मुजरिम के विरुद्ध 302 का प्रकरण पंजीबद्ध नहीं किया गया तो उग्र आंदोलन होगा सिंगरौली की जनता को इस तरह से पुलिसिया अत्याचार से हम लोग नहीं मरने देंगे।