छिन्दवाड़ा की सीएम हेल्पलाइन गैंग का बैतूल में भ्रष्टाचार का आतंक

आदिवासी आँचल जिला बैतूल में सीएम हेल्पलाइन लगाने हेतु छिदवाड़ा की एक गैंग लगभग 1.5 – 2 वर्षों से सक्रिय है l इस ओर न प्रशासन का ध्यान है न पुलिस विभाग का कोई ध्यान है l इस गैंग का शिकार एक किसी विभाग पर न होकर शिक्षा विभाग, पंचायत विभाग , आरईएस विभाग, राजस्व विभाग , नगरीय प्रशासन, जनजातीय कार्य विभाग इत्यादि सभी जगह सीएम हेल्पलाइन का लगाकर बिना पैसे लिए बंद न करने का भष्टाचार का आतंक फैलाया हुआ है l सूत्रो का माने तो एक ही प्रकार की हेल्पलाइन बंद कराने हेतु एक एक कर्मचारी सचिव के द्वारा 16000-18000 हज़ार रुपय तक दे चुके है l अज्ञात सचिव का कहना है कई बार उक्त संबंध में वरिष्ठ अधिकारी को मौखिक रूप से अवगत कराया गया किंतु उनके द्वारा भी कोई समाधान नहीं किया जा सका l इस गैंग के द्वारा जिसे हमारे द्वारा ट्रैक किया जा सका एक समान प्रारूप की लगभग 1789 शिकायते दर्ज की है l यह संख्या इससे कई अधिक हो सकती है इस गैंग का बैतूल, छिंदवाडा, पांढुरना जिला सर्वाधिक शिकार है l उक्त गैंग ने प्रतिमाह 200-300 शिकायत की जाकर 200000-300000 लाख की कमाई का जरिया बनाया गया है उक्त गैंग का पूरा काम फ़ोन पे , गूगल पे इत्यादि पर होता है lयदि प्रशासन चाहे तो इनको पकड़े जाना अत्यंत आसान है!
बैतूल जिले में इस गैग का आतंक चरम सीमा पर हैँ, जो इस प्रकार शिकायतों कि संख्या मात्र 10 नंबर से डुप्लीकेट नाम से की जाती हैँ!
ये रहे मास्टरमाइंड के डुप्लीकेट नाम व शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर व कुल दर्ज शिकायते
1) मनोज 9926705705 कुल शिकायते 325
2) अजय 9165151491 कुल शिकायत 125
3) मन्नू 9617393938 कुल शिकायत 23
4) अशोक 9098151811 कुल शिकायत 140
5) अभीषेख 7566063171 कुल शिकायत 76
6) अर्शान 9752937798 कुल शिकायत 189
7) अरहान 9238555940 कुल शिकायत 235
8) नाम 9165151491 कुल शिकायत 125
9) आशुतोष 7489946635 कुल शिकायत 231 ऐसी अनेकों नंबर से शिकायत करते हैं
इन शियतकर्ता के मोबाइल नंबर से यदि शासन साइबर जांच करे तो इस प्रकार की फर्जी शिकायत का भाड़ाफोड़ हो जाएगा l
सभी अधिकारी- कर्मचारियों द्वारा कलेक्टर महोदय व पुलिस विभाग से अपील की है l उक्त गैंग की फर्जी शिकायतों से शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं का दुरुपयोग हो रहा है l उक्त सम्बंध में आवश्यक साइबर जाच कर न्यायपूर्ण कार्यवाही की उम्मीद है तथा जिन लोगो का हेल्पलाइन करके एक मात्र मगसद ब्लैकमेलिंग होता है ऐसे लोगो के लिए L1 पर शिकायत क्लोज्ड करने का ऑप्सशन होना चाहिए l ताकि हेल्पलाइन का उपयोग सही हितग्राही कर सके व उनको सही लाभ प्राप्त हो सके l अभी अत्यधिक समय शिकायत बंद कराने के दबाव के कारण फर्जी शिकायत के निराकरण में चला जाता है व मानसिक रूप से परेशान होना होता है l
सीएम हेल्पलाइन शिकायत का विवरण ऐसे डराया जाता है अधिकारी कर्मचारी को
उधारण नंबर 01
……… जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत ……… में ग्राम पंचायत एजेंसी द्वारा किया लाखों रुपये का भ्रस्टाचार , सन 2020, 15वा वित्त आयोग द्वारा सीसी सड़क निर्माण ,……. के घर की और 300 मीटर जिसकी वित्तीय स्विकृत राशी 551420 रुपये हैं। परंतु इस कार्य पर स्विकृत से अधिक 561230 रुपए खर्च किया गया हैं। इसका मतलब की ग्राम पंचायत एजेंसी सरपंच , सचिव , इंजीनियर द्वारा बिना रिवाईश टीएस इस्टीमेट के कार्य करके फ़र्ज़ी तरीके से शासन द्वारा स्वीकृत राशि अधिक …… रुपए का फ़र्ज़ी आहरण किया गया हैं। इसकी जांच की जाए।
उधारण नंबर 02
परासिया जनपद पंचायत में चल रहा खुला भ्रस्टाचार परासिया जनपद पंचायत के ADO द्वारा सभी पंचायतों में सचिवो से जबरदस्त सेटिंग करके रखे हुए हैं और कुछ प्रत्रकार है जो इनके खास है उनके द्वारा ये हर पंचायत में शिकायत लगवाकर खुद की जेब गरम कर रहे हैं और सचिवो को जांच के नाम पर धमकाते भी है और कोई नया पत्रकार अगर इनके चँगुल मे फशा तो उसके साथ मीठी मीठी बातों से गेम खेलकर खुद की जेब गरम कर रहे श्रीमान जी और जनपद के कर्मचारी भी इनकी कार्यप्रणाली से त्रस्त है इनके कार्यकाल की जांच की जाए और अगर जांच नहीं होती है तो जिला कलेक्टर महोदय जी,संबंधित मंत्रालय को इनके काम की शिकायत की जायेगी।
उधारण नंबर 03
जनपद पंचायत …… के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत …….. मे नए सचिव द्वारा नियुक्ति लेते ही 15वा वित्त आयोग में भ्रष्टाचार का खेल सुरु कर दिया सचिव के द्वारा बिना निर्माण कार्य कराए फ़र्ज़ी बिलो द्वारा वो भी बिना जीएसटी (GST) के शासन को लाखो रुपये का चूना लगाया गया है 1,भुगतान क्रमांक 3286699 दिनांक 26।10।2024 को 111384 रुपये के 6 बिल। 2, भुगतान क्रमांक 3275770 दिनांक 16।10।2024 को 14 बिल 116456।3 ,भुगतान क्रमांक 3267991के 4 बिल। इन सभी राशि पर 1 ही बिल बहुत सी अलग अलग राशी पर लगा है और भी बहुत से बिल है जो शासन द्वारा निर्माण कार्य के लिये स्वीकृत किये गए थे परंतु कुछ जगह घटिया निर्माण कर शासन को 15वा वित्त की राशि का दुरुपयोग कर फ़र्ज़ी तरीके से लगभग 35 से 40 लाख का फ़र्ज़ी आहरण किया गया है। सचिव द्वारा बिना कार्य कार्य किये सचिव द्वारा बिना जीएसटी के बिल लगाकर शासन को लाखो का चूना लगाया गया है जो कि वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है 2024 के जितने भी बिल है उसकी जांच की जाए और प्रतिवेदन दिया जाए।जाँच सही नहीं पाए जाने पर जिला कलेक्टर महोदय जी से शिकायत की जाएगी।
उधारण नंबर 04
जनपद के अंतर्गत आने वाला बालक छात्रावास जो कि ग्राम …… मे स्थित है । इस छात्रावास में घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार चल रहा है यहां पर अधीक्षक हमेशा गायब रहता है चौकीदार के भरोसे बच्चो को छोड़ देता है और यहां के शिक्षक भी अपनी मनमर्जी से आते हैं यहां पर बच्चो को साफ पानी नहीं दिया जाता है सन 2019 से 2024 तक शासन द्वारा बच्चो के सुविधा के लिए कितनी राशि स्वीकृत की गई और क्या क्या सुविधा दी गयी इसकी भी जानकारी दी जाए। और मेनू के हिसाब से कभी खाना नहीं बना यहां के अधीक्षक घर बैठे पेमेंट ले रहे हैं और छात्रावास चौकीदार के भरोसे छोड़ देते हैं अगर रात मे कोई घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।अधिकारी भी सबकुछ जानते हुए कोई कार्यवाही नही करते भेट चढ़ रही है इसलिए कोई कार्यवाही नही होती अगर अधीक्षक की कार्यप्रणाली की जांच की जाए यो ग्रामीण खुद अधीक्षक के बारे में बता देंगेंगर उचित कार्यवाही नही होती हैं यो जिला कलेक्टर महोदया को इनकी लापरवाही की शिकायत की जाएगी जो बच्चो का भविष्य खराब कर रहे हैं इसकी जांच उच्च स्तरीय राजपत्रित महोदय से करवा कर कठोर कार्यवाही की जाए।
इस प्रकार होता है सीएम हेल्पलाइन का धंधा
छिंदवाड़ा गैंग सर्वप्रथम पंचायत दर्पण, मनरेगा जैसे पोर्टल पर छानवीन कर निर्माण कार्य की जानकारी जुटाती है फिर एक प्रकार के लिपिक का प्रयोग करते हुए जिले की अगल अलग 30-40 पंचायतों में एक समान शिकायत केवल कार्यों का नाम व स्वीकृत राशि को चेंज करते हुए CM helpline एप्लीकेशन के माध्यम से हेल्पलाइन दर्ज करायी जाती है l एक बार पैसा लेकर शिकायत बंद करने के उपरांत नवीन नंबर से शिकायत दर्ज की जाती है इस प्रकार इस गैंग द्वारा प्रत्येक माह एक नए मोबाइल नंबर व नाम का प्रयोग कर हेल्पलाइन दर्ज की जाती है l शिकायत में बिदुओ पर जांच होने के उपरांत भी शिकायत न विकासखंड स्तर से शिकायत बंद होती है न जिले से शिकायत बंद होती है l इसी का फ़ायदा गैंग द्वारा उठाया जाता है l एवं अंत में ग्रेडिंग के दबाब में हर माह की 20 तारिक तक शिकायत बंद कराना अधिकारी / कर्मचारी के लिए मजबूरी हो जाती है l इस सब के बारे में कर्मचारियों के द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत किए जाना चाहा गया किंतु गैंग द्वारा अपने गुप्त सूत्रो से जानकारी प्राप्त कर ओर अधिक शिकायत दर्ज कराई जाने की धमकी संबंधित को दी जाती है l इस डर के कारण इस विषय पर शिकायत के लिए कोई कर्मचारी आगे न आ सका l
इस खबर के जरिए सभी विभागों के अधिकारी व कर्मचारी में शासन प्रशासन से कार्यवाही की उम्मीद की एक किरण जागी है इसका क्या प्रभाव होता है यह हेल्पलाइन का सिस्टम ऐसे ही चलता रहेगा या इसमें सुधार की उम्मीद की जा सकती है यह आने बाला वक्त ही बता पाएगा l