बांग्ला एवं बांग्ला साहित्य पत्रिका की ओर से स्मरणीय कार्यक्रम:-
रथिन सिंह रॉय
“हृदय की निराकार ज्योति में
उज्ज्वल प्रकाश में अमृत जीवन
उग्र भावना ही राष्ट्रवाद का नया सूर्य है।” बांग्ला साहित्य में प्राचीन इतिहास छिपा है। आम लोग। देश की आजादी-जुनून-समाज। उनकी आत्मा चेतना और गति से जुड़ी है।
बांग्ला एवं बांग्ला साहित्य पत्रिका का साहित्यिक कार्यक्रम बुधवार को कृष्णपद मेमोरियल हॉल में हुआ। पश्चिम बंगाल सरकार के पुरस्कार विजेता गायक रंजीत भट्टाचार्य और बंगाली गीतकार दिलीप रॉय ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
यहां उपस्थित प्रख्यात कवियों-साहित्यकारों एवं भाषण कलाकारों द्वारा काव्य पाठ-पाठ एवं गायन से दिन के कार्यक्रम की शोभा बढ़ती है। बंगाली और बंगलियाना साहित्यिक पत्रिकाओं के शुभारंभ के साथ-साथ, सीमांत क्षेत्रों के साहित्यिक और नए लेखकों को उजागर करने की अनूठी पहल है। इसके अलावा किताबें खरीदकर एक-दूसरे को उपहार में देना, इस डिजिटल युग में किताबों की पाठक संख्या बढ़ाना आदि।
नई पीढ़ी के लिए आधुनिक अंग्रेजी शब्दों की भीड़ के कारण बांग्ला भाषा लगभग विलुप्त होने के कगार पर है। इस कारण से, कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बंगाली साहित्य की नई पीढ़ी के पाठकों की संख्या बढ़ाना और मातृभाषा को मजबूत करना था। इस तरह की पहल की दर्शकों के एक वर्ग ने सराहना की।
इस खूबसूरत समारोह में संपादक सुब्रत गोस्वामी, अध्यक्ष समीर मुखर्जी, व्यवस्थापक मीता सिन्हा, भास्कर लाहिड़ी, देबाशीष घोष और शबनम बसु उपस्थित थे। राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षक साधन कुमार हलदर, लेखक-सामाजिक कार्यकर्ता मानव मुखोपाध्याय, प्रख्यात बाचिच कलाकार सुप्रिया विश्वास-विरोध बाचिच कलाकार सुदेशना मंडल, बेबी चक्रवर्ती, उत्तर बंगाल की लेखिका-गायिका-शिक्षिका परमिता अधिकारी, उजन