गुरुवार को बालीझोर पंचायत में आदिवासी मुंडा समाज और मूलवासी संगठन के द्वारा संयुक्त रुप से भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। श्रद्धांजलि सभा की अध्यक्षता आदिवासी मुंडा समाज के संगठन सचिव अनूप सोलंकी के द्वारा की गई । श्री सोलंकी ने अपने संबोधन में कहा भगवान बिरसा मुंडा का जल,जंगल एवं जमीन की रक्षा में अद्वित्य योगदान रहा है।

भगवान बिरसा मुंडा के नक्शे कदम पर सभी नौजवानो को चलने की अतिआवश्यकता है। श्रद्धांजलि सभा में समाजसेवी अशोक पान ने अपने वक्तव्य में कहा कि 1897 में भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में जो आंदोलन अंग्रेजो के खिलाफ चलाया गया, उस आंदोलन को “उलगुलन” के नाम से आज भी जाना जाता है और राजनीतिक स्तर पर भी आदिवासियों और मूल वासियों को संगठित करने का काम भगवान बिरसा मुंडा ने ही किया। ब्रिटिश हुकूमत ने इसे खतरे का संकेत समझकर बिरसा मुंडा को गिरफ्तार कर रांची के जेल में डाल दिया । वहां पर अंग्रेजों ने उन्हें धीमा जहर दिया गया। जिस कारण 9 जून 1900 ई० को भगवान बिरसा मुंडा शहीद हो गए।
श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से बालीझरण पंचायत के नवनिर्वाचित मुखिया रवि सामद जी, कोटगढ़ पंचायत के नवनिर्वाचित मुखिया बामिया चंपिया जी, पेटेता पंचायत के नवनिर्वाचित पंचायत समिति सदस्य मांगीलाल केराई जी,बालीझोर पचायत के पंचायत समिति सदस्य सतीश टाकुर, के आलावा बालीझोर पंचायत से सभी वार्ड पार्षद श्रीमती भाग्यश्री टूटी, माया गुरुम, संचिता लकडा, बेबी मित्रा,भानुमति शांडिल ,शंकर सुलांकी , जगन्नाथ टूटी ,आदि उपस्थित हुए।
श्रद्धांजलि सभा का संचालन रमेश सोलंकी और धन्यवाद ज्ञापन धनुर्जय शांडिल द्वारा किया गया।