भारतीय संस्कृति में नारी का महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों में नारी को ग्रहलक्ष्मी,ब्रह्मविद्या, श्रद्धा, शक्ति, पवित्रता,कला, अन्नपूर्णा, रिद्धी-सिद्धी तथा मूतर्तिमान कामधेनु कहा गया है। इस विषय में गुरुदेव लिखते हैं कि नारी मनुष्य के समस्त अभाओ, कष्टों और संकटों का निवारण करने में समर्थ है

भारतीय संस्कृति में नारी का महत्वपूर्ण स्थान है। शास्त्रों में नारी को ग्रहलक्ष्मी,ब्रह्मविद्या, श्रद्धा, शक्ति, पवित्रता,कला, अन्नपूर्णा, रिद्धी-सिद्धी तथा मूतर्तिमान कामधेनु कहा गया है। इस विषय में गुरुदेव लिखते हैं कि नारी मनुष्य के समस्त अभाओ, कष्टों और संकटों का निवारण करने में समर्थ है

 

 

 

 

।यदि उसे श्रद्धा पूर्वक सद्भभावना से सींचा जाए तो वह सोमलता विश्व के कण-कण को अपने स्नेहाम्रृत से सींच सकतीं हैं। उक्त विचार है अखिल विश्व गायत्री परिवार परिव्राजक पं राजेश दीक्षित के जिन्होने शारदानगर के निकट ग्राम रौली रामापुर में चल रही पंच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ में श्रीमद् प्रज्ञा पुराण की पावन कथा सुनाते हुए कहे। महायज्ञ में पं अवधेश बाजपेई ने संगीत दिया। महायज्ञ में रात्रि में दीपमहायज्ञ किया गया जिसमें नकहा ब्लाक प्रमुख पवन गुप्ता ने दीप प्रज्वलित किया। महायज्ञ का समापन भंडारे के साथ हुआ।यज्ञ में सैकड़ों परिजनों ने आहुतियां डाली।यज्ञ की व्यवस्था किया राम गोपाल शर्मा व ग्राम प्रधान राम लखन व अन्य सहयोगियों ने

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