स्लग :– सोना खाईंन के गुप्त गंगा एक अदभुत पौराणिक स्थल के रूप में मौजूद है
लोकेशन :– बोलबा, सिमडेगा ।
रिपोर्ट :– कालो ख़लखो
एंकर :– सिमडेगा जिले के केरसई प्रखण्ड अन्तर्गत पूर्बी टाइसेर पंचायत के ढोढ़ीजोर गाँव स्थित जंगल सटे सोना खाईंन के गुप्त गंगा आदि काल से मौजूद है । यह एक अद्भुत और पौराणिक स्थल है । यहां चट्टान के ऊपर गुप्त गंगा के रूप मेंअथाह पानी है । गुप्त गंगा अर्थात ऐसा पानी बाहर का बहता हुआ पानी उसमे नहीं मिलता हो । उसे गुप्त गंगा कहते हैं ।
गुप्त गंगा के बारे लोग बताते हैं कि यहाँ आदिकाल से पूजा -अर्चना करते आ रहे हैं । बताया जाता है गुप्त गंगा का दूसरा छोर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में मिलती है । इसके कई प्रकार के प्रमाण भी मिलता है ।
🔹गुप्तगंगा का इतिहास —
गुप्त गंगा में झोरा जाति के लोग सोना प्राप्ति के लिए खुदाई कर रहे थे । पूर्व में इस इलाके में बहुत अधिक मात्रा में सोना मिलता था । खुदाई के दौरान इतना अधिक सोना मिलने लगा कि लोग लालच में आ गए । इसी क्रम में एक बड़ा सा सोना का टुकड़ा मिला । उस सोने की खुदाई के लिए 12 परिवार के लोग शामिल थे । सिर्फ एक बच्चा को दूध पिलाती महिला वहाँ बाहर में बैठी रही । खुदाई के क्रम में मिला हुआ सोना का आकार अन्दर में बड़ा होते जा रहा था । इसके साथ एक बड़ा गुफा भी बनते जा रहा था । सभी लोग एक साथ जोर लगाकर जैसे ही बैल आकार का बड़ा सोना को खींचने लगे सोना अन्दर की ओर चला गया । वहाँ एकाएक वहाँ पानी भर गया । सोना निकालने वाले सभी लोग पानी में डूब गए । जब लोग पानी डूब रहे थे तो दूध पिलाती महिला ने चिल्लाने लगी कि सोना को छोड़ दीजिए और बाहर निकल आइए किंतु सभी लोग उस जल में समा गए । वह महिला एक सप्ताह तक वहाँ बैठी – बैठी लौट आने का इन्तजार करती रही लेकिन कोई वापस नहीं लौटा । इन्तजार का सब्र जब टूटने लगा तो बगल के गाँव जाकर घटना को बताते हुए मदद माँगने लगी । गाँव वालों के आने तक सभी लोग जल में समाकर गुप्त हो चुके थे ।
🔹यह घटना दैविक या प्राकृतिक था यह कहना मुश्किल है । किंतु झोरा जाति के लोगों को अभी भी वहाँ जाना खतरा माना जाता है । 1932 के सर्वे के अनुसार सोना खाईंन के नाम से 14 एकड़ 21 डिसमिल जमीन दर्ज है ।
🔹 गुप्त गंगा को पर्यटक स्थल के रूप में विकास करने के लिए ग्रामीणों ने प्रसाशन एवं जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिया है किंतु अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है । यहाँ प्रसाशनिक स्तर से कोई कार्य नही हुई है । विधायक मद से एक चबूतरा का निर्माण काफी समय पहले हुआ था । ग्रामीण साफ-सफाई करके पूजा अर्चना करते है । इसके साथ ही मुण्डन एवं कई तरह के धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संस्कार कार्य होता है । यहाँ लोग पिकनिक के लिए भी आते है । गांव के नरेंद्र कुमार माँझी, खिरोधर माँझी , आसमान माँझी सहित कई ग्रामीणों ने गुप्त गंगा स्थल को अविलम्ब पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की माँग किया है ।