कथावाचक योगेश कृष्ण शास्त्री बोले भागवत कथा सिखाती है जीवन जीने की कला

बयाना। क्षेत्र के गांव हरनगर में सप्त दिवसीय संचालित कार्यक्रम के तहत 22 मई को शुभारंभ होकर 28 मई को कथा का समापन होगा। इसके बाद पूर्णाहुति, हवन एवं प्रसादी वितरण का कार्यक्रम किया जाएगा।

कथावाचक योगेश कृष्ण शास्त्री की ओर से कथा के पांचवें दिन गोवर्धन लीला का वर्णन करते हुए कहा गया कि बृजवासी इंद्र को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ की तैयारी कर रहे थे। भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि आप इंद्र के लिए यज्ञ क्यों कर रहे हो। नंद बाबा ने कहा कि अगर हम इंद्र के लिए यज्ञ नहीं करेंगे तो इंद्र देवता वर्षा नहीं करेंगे। भगवान कृष्ण ने सभी ब्रजवासियों को प्रभु की लीलाओं से अवगत कराते हुए गिर्राजजी का यज्ञ करने के लिए मना लिया। उन्होंने बताया कि गिरिराज गोवर्धन भगवान विष्णु स्वरूप है। भगवान कृष्ण ने गिर्राज जी के लिए यज्ञ करके यह सिद्ध किया कि अगर भगवान को प्रसन्न कर लिया जाए तो देवी देवताओं को प्रसन्न करने की आवश्यकता नहीं रह जाती है। उन्होंने कहा कि भगवान भक्त के भाव के भूखे होते हैं। साथ ही भागवत कथा जीवन जीने की कला भी सिखाती है। हमें इसके संदेश को जीवन में अपनाना चाहिए। कथा में गिरिराज जी को छप्पन भोग लगाया गया।रामसिंह शर्मा ने बताया कथा श्रवण में सैकड़ों महिला व पुरुष मौजूद थे।

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