डेढ़ घटे तक मेडिकल काॅलेज हमीरपुर के गेट पर स्टेचर पर पड़ा रहा घुमारवीं से रेफर घायल ट्रक चालक, एमएलसी की मांग ने उलझाए परिजन; शिकायत के बाद मिला उपचार
विनोद चड्ढा कुठेड़ा बिलासपुर
शिमला-धर्मशाला एनएच पर नस्वाल के समीप एचआरटीसी और ट्रक की टक्कर में घायल हुए ट्रक चालक को उपचार के लिए मेडिकल काॅलेज हमीरपुर के इंमरजेंसी वार्ड में डेढ़ घंटे तक बेड के लिए संघर्ष करना पड़ा। घायल के परिजनों ने यह दावा किया है। मंगलवार दोपहर को घायल को प्राथमिक उपचार के बाद घुमारवी अस्पताल से रैफर किया गया लेकिन उसे यहां पर इलाज के परेशानियों का सामना करना पड़ा। परिजनों को मुताबिक उपचार के डेढ़ घंटे तक घायल ट्रक चालक देवेंद्र मेडिकल काॅलेज के गेट पर स्टेचर पर रहने के लिए मजबूर होना पड़ा। घायल देवेंद्र के परिजनों का कहना है कि जब वह इंमरजेंसी वार्ड में पहुंचे तो सीधा उनसे दुर्घटना की एमएलसी मांगी गई। उपचार देने के बजाए उन्हें कागजी औपचारिकताओं में उलझाया गया। पहले एक्सरे के लिए अस्पताल प्रबंधन की तरफ से एमएलसी की मांग गई। जब वार्ड में बेड दिए जाने और उपचार शुरू करने की बात मौके पर मौजूद डाक्टर से की तो उन्हें फिर उन्हें एमएलसी जमा करवाने का तर्क दिया गया। बेड लेने के लिए करीब डेढ़ घंटे तक उन्हें संघर्ष करना पड़ा और इतना ही समय एक्सरे करवाने के लिए भी लगा। एक्सरे के बाद सीटी स्कैन के लिए जब डाक्टर ने लिखा तो इसके लिए फिर घुमारवीं अस्पताल से एमएलसी लाने की मांग की गई है। मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के अधिकारियों से शिकायत और आग्रह करने के बाद उनका सीटी स्कैन हुआ। घायल देवेंद्र के भतीजे अमन का कहना है कि वह जब मेडिकल काॅलेज हमीरपुर में चाचा को लेकर पहुंचे तो उनके साथ घुमारवीं अस्पताल की नर्स भी साथ थी। नर्स ने रैफर पर्ची को इमरजेंसी वार्ड में जमा करवाया लेकिन यहां पर उपचार शुरू करने के लिए एमएलसी की मांग की गई। डेढ़ घंटे के बाद उनके चाचा को वार्ड में बेड मिला और फिर उनका एक्सरे हुआ। इसके बाद तीन से चार घंटे तक सीटी स्कैन करवाने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ा। अंत में अस्पताल के एमएस से बात की तब जाकर सीटी स्कैन छह बजे के बाद हुआ। सीटी स्कैन के लिए दुर्घटना की एमएलसी की मांग की जाती रही और बाद में अधिकारियों से बात करने के बाद यह कार्य हुआ।
कागज जरूरी है फिर घायल का उपचार और जान
घायल व्यक्ति के रिश्तेदार एवं हमीरपुर जिला की समताना पंचायत के प्रधान बलवीर ने कहा कि घायल और परिजनों को यहां पर समस्या का सामना करना पड़ा है। वह सूचना मिलने के बाद जब मेडिकल काॅलेज में पहुंचे तो इनका उपचार शुरू नहीं हो पाया था। अधिकारियों से जब शिकायत की गई तो पहले बेड मिला और एक्सरे और सीटी स्कैन भी किया गया। एमएलसी की मांग जा रही थी लेकिन क्या घायल का उपचार जल्द होना चाहिए या फिर जान से बढ़कर कागज की कीमत है।
परिजनों ने मामला ध्यान में लाया था, ऐसे मामलों में एमएलसी जरूरी: एमएस
वहीं जब इस बारे में मेडिकल काॅलेज हमीरपुर के एमएस डा रमेश चौहान से बात की गई तो उन्होंने कहा कि घायल व्यक्ति के परिजनों से उनकी बात हुई थी। ऐसे मामलों एमएलसी अनिवार्य होती है, हालांकि घायल की समस्या को ध्यान में रखते हुए उन्हें उपचार दिया गया है। घायल का एक्सरे और सीटी स्कैन भी करवा दिया गया है। देरी के सवाल पर उन्होंने कहा कि नियमों के तहत ही मौके पर मौजूद डाक्टर को कार्य करना होता है। घायल के परिजनों से बात की गई और मरीज का एक्सरे और सीटी स्कैन करवा दिया गया है।