तपोभूमि, मनाली में हुआ दिव्य निरंकारी संत समागम

प्रेस विज्ञप्ति

मनाली, 1 जून, 2022:- “समान दृष्टिकोण को अपनाते हुए संतों वाला जीवन जीये।“ यह दिव्य प्रवचन सत्गुरू माता सुदीक्षा जी महाराज द्वारा आज दिनांक 1 जून को हास्पिटल ग्राउंड, मनाली में आयोजित एक विशाल निरंकारी संत समागम में व्यक्त किये गए।
…जीत कपूर कुल्लू…..
सत्गुरू माता जी ने अपने प्रतिपादन में कहा कि यदि हम किसी स्वार्थ की पूर्ति के लिए ईश्वर की स्तुति करते हैं, तो वह भक्ति नहीं कहलाती। भक्ति तो हर पल, हर कर्म को करते हुए ईश्वर की याद में जीवन जीने का नाम है। यह एक हमारा स्वभाव बन जाना चाहिए।

सत्गुरू माता जी ने अपने पावन प्रवचनों में कहा कि मन में प्रभु परमात्मा के प्रति आस्था ही प्रत्यक्ष भक्ति का प्रमाण है। जिस प्रकार सूरजमुखी का पुष्प अपना मुख सूर्य की ओर ही रखता है। ठीक उसी प्रकार से भक्त सदैव प्रभु परमात्मा की लगन एवं निष्ठा से भक्ति करते हुए मन को पवित्र बनाता है। मनाली अर्थात् मन वाली अवस्था; क्या हम स्वयं के भावों को दूसरों से अहंकार वश मनवाने का प्रयास करते हैं या संतों की भांति हर कार्य को प्रभु इच्छा समझकर मान लेते है।

अक्सर ऐसा देखा गया है कि जो वस्तु हमारे पास है उस पर हमारा ध्यान नहीं होता अपितु जो वस्तु नहीं है उस पर ही हमारा ध्यान केन्द्रित रहता है। अपने जीवन में यदि हम देखे तो हमारे पास साईकल है तो हमें स्कूटर की इच्छा होती है और स्कूटर मिल जाता है तो फिर गाड़ी की और फिर जहाज की। यह लालसा निरंतर बढ़ती ही रहती है और जीवन की जो वास्तविक सत्यता है उस पर मन एकाग्रचित नहीं रहता। हमारा मन माया के प्रभाव में ही लगा रहता है और हम अपना मूल्यवान जीवन व्यर्थ कर देते है।

सत्गुरू माता जी ने उदाहरण सहित समझाया कि जैसा दृष्टिकोण हम दूसरों के प्रति रखते है वैसे ही वह हमें नज़र आते है। भक्त परमात्मा को जानकर अपना हर पल इस निरंकार को ही अर्पित कर देता है फिर वह तर्क नहीं देता कि मैं ही श्रेष्ठ हूँ, हर कार्य मुझ से ही संभव है। दृष्टिकोण महत्वपूर्ण होता है तथ्य नहीं। अपनी धारणा समान रूप वाली, सर्वत्र के भले वाली होनी चाहिए न कि नफरत, वैर, ईर्ष्या वाली। यदि हम स्वंय में सुधार करेंगें तो पूरा संसार ही उत्तम दिखेगा। अंत में सत्गुरू माता जी ने सभी श्रद्धालुओं के लिए संतों वाला जीवन जीने की कामना करी।

मनाली के मुखी श्री प्रताप ठाकुर ने सत्गुरु माता जी के प्रति हृदय से आभार प्रकट किया और साथ ही प्रशासन एवं स्थानिक सज्जनों के सहयोग के लिए धन्यवाद भी किया। इस सत्संग कार्यक्रम में सत्गुरू माता जी के जीवन साथी आदरणीय श्री रमित चांदना जी ने भी अपने मन के भावों को विचारों के माध्यम से प्रकट किया। इस समागम में मनाली एवं उसके आसपास के क्षेत्रों से सभी संतों ने हिस्सा लेकर सत्गुरु माता जी के पावन प्रवचनों एवं उनके दिव्य दर्शनों द्वारा स्वयं को निहाल किया।
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