सिंगरौली की तहसील चितरंगी में अवैध स्टोन क्रेशर यूनिट संचालित
REPOTER BY – चन्द्र देव शाह , सिंगरौली
जिला सिंगरौली की तहसील चितरंगी में सरकारी नियमों को ताक में रखकर विगत कई वर्षों से अनेकों स्टोन क्रेशर यूनिट संचालित हैं जो कि अवैध रूप से ज़मीन और पानी का दोहन कर रही हैं।
अवैध खनन और पर्यावरण को हानि पहुंचाता हुआ और अवैध रूप से संचालित स्टोन क्रेशर यूनिट का एक मामला जिला सिंगरौली की तहसील चितरंगी के ग्राम बड़कुड़ का सामने आया है। यह स्टोन क्रेशर यूनिट उत्तर प्रदेश के वाराणसी का निवासी प्रदीप जायसवाल द्वारा ग्राम पंचायत बडकुड (पिपरवान) के राजस्व आराजी क्रमांक 217, 216/1, 216/2, 216/3 में विगत कई सालो से संचालित है। आराजी क्रमांक 217 म०प्र० शासन जो की नाला है और यह राजस्व ग्राम बड़कुड़ और पिपरवान की राजस्व सीमा का निर्माण करता है। राजस्व ग्राम की सीमा का दोहन लगातार बड़े पैमाने पर सतत रूप से किया जा रहा है। नाला जो कि जल स्रोत भी है, जहां बड़े पैमाने पर मवेशी और पास के रहवासी पानी के लिए निर्भर है, का अवैध खनन किया जा रहा है। आराजी क्रमांक 216/2 व 216/3 अहस्तांतरित पट्टे की आराजी है जो कि रामसुंदर एवं श्यामसुंदर पिता शिवपति के नाम पर दर्ज है का अवैध खनन जारी है। क्रेसर प्लांट में किसी भी प्रदुषण नियमो का पालन नहीं किया जा रहा जिससे पास के जनजीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सीमा से ज्यादा खनन हो रहा है। किसी भी प्रकार के पर्यावरण के नियमो का पालन नहीं हो रहा है। भारी मात्रा में ग्रामीणों की फसल बरबाद हो रही है। सीमा से ज्यादा खनन होने के वजह से आए दिन भूमि अपरदन का खतरा बढ़ा रहता है जिससे कि ग्राम वासियों के जान पर बन आई है। प्रशासन आंख बंद कर सोया हुआ है। खनिज अधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार कभी जांच करने नही आते हैं।
ऐसे कई स्टोन क्रेशर यूनिट इस क्षेत्र में चल रहे हैं। तहसील चितरंगी में थाना चितरंगी और थाना गढ़वा है और इनके अंतर्गत बगदरा चौकी और नौडिहवा चौकी माड़ा तहसील के मकरोहर गाँव आती हैं, जिन्हें हर महीने मोटी रकम पहुंच रही है। खनिज विभाग इन स्टोन क्रेशर यूनिट से भारी भरकम राशि वसूल रहे हैं। इस क्षेत्र मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पर्यावरण की अनदेखी भी की जा रही है, ऐसे में इसकी भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है।
स्थानीय लोगों ने निवेदन किया है कि अवैध चल रहे क्रेसर प्लांट को बंद कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाय एवं प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों का चल रहे निरंकुश दोहन को बंद किया जाय।