अपने नजरिए को थोड़ा सा बदल कर देखें तो समाज मे बहुत बदलाव लाया जा सकता है इसका जीता जागता उदाहरण तहसील उतरौला मे एक

उतरौला

रिपोर्टर वाजिद हुसैन

अपने नजरिए को थोड़ा सा बदल कर देखें तो समाज मे बहुत बदलाव लाया जा सकता है इसका जीता जागता उदाहरण तहसील उतरौला मे एक* सामाजिक एवं सहित्यिक संस्था अभिव्यक्ति जिसके अध्यक्ष स्वर्गीय डॉ शेहाब ज़फ़र ने विगत कई वर्षों से रमज़ान मे रमज़ान किट प्रोजेक्ट को शुरू किया था ।*

हालांकि अब वह हमारे बीच नहीं हैं लेकिन इस रवायात को उनके छोटे भाई सीमाब ज़फ़र ने इस साल भी ज़िंदा रखा और रमज़ान किट घर घर पहुंचाने मे अहम भूमिका निभाई l

लगभग 100 परिवारों को 2500 ₹ की लागत से बने किट को ज़रूरतमंदों तक वितरित किया गया ।

सीमाब ज़फ़र का कहना है कि गरीब की गुरबत का अहसास, भूखे की भूख का अहसास, मजबूरों की परेशानी से आपके दिल में उनके लिए कुछ करने जज्बा पैदा होना ही इंसानियत का फर्ज़ है और ऐसे लोग अल्लाह के महबूब बंदे है जिन्हें इस नेक काम के लिए अल्लाह ने चुना है ।

इस मुहिम से समाज के यतीम, बेवा, मिस्कीन और ऐसे खुद्दार लोगों की मदद की जाती है जो लोगों के सामने हाथ नहीं फैलाते l

रमज़ान मे बिना कुछ खाए पिए पूरे दिन भूखा रहने के बाद शाम को इफ्तार का इंतज़ाम और फिर सुबह सेहरी के लिए लोगों को पैसे की कमी की वजह से दिक्कत का सामना ना करना पड़े इसलिए रमज़ान किट का वितरण किया जाता है l

संस्था के सचिव अबुल हाशिम खान ने बताया कि पूर्व मे इस तरह के कई कार्य जैसे ठंड मे कंबलों का वितरण, नेकी की दीवार, शिक्षा के छेत्र मे श्रेष्ठ प्रतिभा का चयन और उनके सम्मान मे भव्य समारोह किया जाता रहा है l

जिस तरह पांचों उँगलियों को इकट्ठा करने पर मुट्ठी बन जाती है उसी प्रकार समाज के बुद्धजीवियों ने इस मुहिम मे सहयोग कर के इस बहुत बड़े अभियान को सफल बनाया .
इस मुहिम मे अबुल हाशिम खान (प्राचार्य) , अनवर महमूद पूर्व विधायक, अंसार अहमद खान ( प्रबंधक HRA स्कूल) , एजाज़ मालिक , मुजीबुल खाँ (पूर्व प्रिंसिपल) , फैज़ान अहमद सिद्दीकी, डॉ, सगीर, डॉ मोबीन , डॉ, नज़र मो., आसिफ मंज़ूर, आसिफ महमूद खान, असलम खान स्कॉलर एकादमी, अबुल आसिम, शादाब ज़फ़र, राजू आदि का विशेष सहयोग रहा

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