राजाखेड़ा सबसे कम उम्र में ब्रह्मचर्य का नियम लेने वाली जैन श्राविका बनी रिद्धि

राजाखेड़ा। “वैराग्य की कोई उम्र नहीं होती वैराग्य कब और किस उम्र में आ जाए ये कहा नहीं जा सकता” उक्त पंक्ति को चरितार्थ किया है राजाखेड़ा निवासी कुमारी रिद्धि जैन पुत्री रामकुमार जैन ने। परिजनों ने बताया कि कुमारी रिद्धि जैन का काफी समय से पूज्य गुरु मां चर्या शिरोमणि गणिनी आर्यिका श्रेष्ठ सौम्य नंदिनी माताजी संघ से जुड़ाव है और गुरु मां के पास आना जाना निरंतर लगा रहता है । विगत माह की 23 तारीख को रिद्धि जैन ने 8 वर्ष की आयु पूर्ण की और शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर जी में विराजमान गुरु मां के चरणों में माता पिता एवं परिवारजनों की उपस्थिति में श्रीफल भेंट कर आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत के लिए निवेदन किया। गुरु मां ने रिद्धि की आयु और भविष्य की स्थिति परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए अष्ट मूलगुण एवं 8 वर्ष तक का ब्रह्मचर्य का नियम दिया । साथ ही अनेक छोटे छोटे नियम दिए और कहा कि
घुटनों के बल चलते चलते पैर खड़े हो जाते हैं।
छोटे-छोटे नियम इक दिन बहुत बड़े हो जाते हैं
रिद्धि ने गुरु मां से निवेदन किया कि हे चर्या शिरोमणि गुरु मां मुझे आप अपनी शिष्या के रूप में स्वीकार करें एवं मेरा मोक्षमार्ग प्रशस्त करें । गुरु मां ने वात्सल्य पूर्वक रिद्धि जैन को अपना मोक्षमार्ग प्रशस्त करने हेतु आशीर्वाद प्रदान किया । संवाददाता मनोज राघव राजाखेड़ा