जयपुर 9 फरवरी 2026
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पर्यावरण प्रेमी संतों एवं प्रबुद्धजनों ने की मुलाकात
खेजड़ी संरक्षण के कानून की घोषणा के लिए जताया आभार एवं किया अभिनंदन
विभिन्न जिलों से आए संत एवं प्रबुद्धजन, कहा – खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून की घोषणा से समाज में हर्ष

जयपुर..रविवार को मुख्यमंत्री निवास पर पर्यावरण प्रेमी संतों एवं प्रबुद्धजनों द्वारा सीएम भजनलाल शर्मा से मुलाकात की गई। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए बिश्नोई समाज के संतों एवं प्रतिनिधियों ने राज्य विधानसभा में 5 फरवरी को खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून लाए जाने की गई घोषणा पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री की यह श्रेष्ठ पहल ऐतिहासिक है। संतों के सान्निध्य में समाज के प्रबुद्धजनों ने भी मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया।
मुकाम पीठाधीश्वर रामानन्द जी महाराज ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि प्रदेश में 70 वर्ष बाद राज्य सरकार द्वारा खेजड़ी की रक्षा के लिए कानून की पहल सराहनीय है तथा इससे समाज में हर्ष है। महन्त स्वामी सच्चिदानंद जी ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने 27 अगस्त 2025 को पर्यावरण प्रेमी संतों एवं प्रतिनिधियों से खेजड़ी संरक्षण के संबंध में सुझाव सुने थे। उस समय मुख्यमंत्री ने जो कहा था वो करके दिखाया। विधानसभा में संतों की मंशा का हवाला देकर कानून बनाने की घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी सरकार खेजड़ी और पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। हमने पर्यावरण प्रेमी संतों एवं प्रतिनिधियों से सुझाव लेते हुए खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून बनाने का आश्वासन दिया था। इसी दिशा में हमने विधानसभा में घोषणा की है और संतों के सुझाव के अनुरूप ही इसकी प्रक्रिया जारी है। उन्होंने आश्वस्त किया कि खेजड़ी संरक्षण के लिए शीघ्र कानून लाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी संस्कृति में वृक्षों, पहाड़ों और नदियों की पूजा की जाती है। हमारी संस्कृति में संतों-ऋषियों का भी विशेष महत्व है और ये समाज को सही मार्ग दिखाते हैं। बिश्नोई समाज ने विश्व को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने की प्रेरणा दी है। उन्होंने भगवान जम्भेश्वर जी एवं मां अमृता देवी को नमन करते हुए कहा कि जम्भेश्वर जी द्वारा प्रतिपादित 29 नियम आज भी पर्यावरण सुरक्षा का अत्यंत प्रभावी मॉडल है। उन्होंने ‘‘जीव दया पालनी, रुख लीलौ नहीं घावै‘‘ के शाश्वत संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि जांभोजी ने हमें निरीह जीवों और पेड़ों की रक्षा को भी भक्ति के एक रूप में सिखाया। इसी तरह, मां अमृता देवी ने प्रकृति को मां का स्वरूप मानकर पर्यावरण की रक्षा और सम्मान करने की सीख दी है। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पेड़ मां के नाम अभियान से प्रेरणा लेकर हमारी सरकार ने वृक्षारोपण का महाअभियान चलाया और दो वर्षों में 20 करोड़ पौधे लगाए। हमारा लक्ष्य है कि पांच वर्षों में 50 करोड़ से अधिक पौधे लगाए जाएं।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मुकाम पीठाधीश्वर रामानन्द जी महाराज, महन्त स्वामी सच्चिदानंद जी सहित सभी संतों का दुपट्टा ओढ़ाकर एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया।
इस दौरान उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री के.के. विश्नोई, राजस्थान राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई, पूर्व विधायक बिहारी लाल बिश्नोई, आचार्य महन्त स्वामी भगवान दास, महन्त स्वामी भागीरथदास शास्त्री, राजू महाराज, स्वामी कृपाचार्य, स्वामी बलदेवानन्द, स्वामी शिवज्योतीषानन्द,महन्त शिवदास जी रूडकली, स्वामी प्रेमदास जी महाराज, रविदास जी महाराज, सुरेन्द्रानन्द जी महाराज, रघुवरदास जी महाराज, शिवदास जी महाराज, महेशानन्द जी महाराज, सहित अन्य संत उपस्थित रहे। साथ ही, बालोतरा, बाड़मेर, नागौर, बीकानेर, जोधपुर, फलौदी, जालोर, श्रीगंगानगर जिले की बिश्नोई समाज की प्रबुद्ध महिलाएं एवं जन उपस्थित रहे…!!
जयपुर से हेमंत दुबे