अपनी मांगों के लेकर किसान पँहुचे जिला मुख्यालय कलेक्टर को ज्ञापन सौंप उग्र आंदोलन की चेतावनी विभिन्न किसान संगठन के पदाधिकारी रहे मौजूद

ब्रेकिंग न्यूज़
संवाददाता,,,,, प्रशांत कुमार,,,,,,,,,
लोकेशन-सिवनी

सिवनी मामला पेच नहर का

अपनी मांगों के लेकर किसान पँहुचे जिला मुख्यालय

कलेक्टर को ज्ञापन सौंप उग्र आंदोलन की चेतावनी

विभिन्न किसान संगठन के पदाधिकारी रहे मौजूद

सिवनी/ बंडोल सर्किल के गाँव खामखरेली, घाटपिपरिया,सिहोरा, बलारपुर, थावरी, सालीवाडा, डुगरिया सहित अन्य गाँवों के सैकड़ो मजदूर किसान महिलाएं अपने खेतों में पेंच सिंचाई परियोजना का पानी अपने खेतों तक पहुँचाये जाने की मांग को लेकर ट्रैक्टर ट्राली व दो पहिया वाहनों से स्थानीय बाबा साहब अंबेडकर प्रतिमा के समक्ष एकत्रित होकर कतार में रैली निकाल जिला कलेक्टर परिसर पहुँच अपनी मांगों का मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है। और 10 दिवस के अंदर माँगो पर सुनवाई ना होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
यहाँ पर विशेष उल्लेखनीय है कि किसानों की मांगों का सँयुक्त किसान मोर्चा के अहं घटक ओबीसी किसान मोर्चा ,अखिल भारतीय किसान सभा, भारतीय किसान यूनियन ,राष्ट्रीय किसान मजदूर महासभा ने भी समर्थन किया है। किसानों की उक्त माँग पर ओबीसी महासभा ने पूर्व में भी उक्त माँगो का ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंप मांग कर चुकी है ओबीसी महासभा के प्रतिनिधि मंडल को स्थानीय विधायक मुनमुन राय ने माँगे पूरी करने का आश्वासन भी दिया था।किन्तु आज दिनांक तक कार्यवाही नगण्य है। क्षेत्र के किसान लंबे समय से अपनी मांगों के इंतजार में आक्रोशित है व मांगे पूरी ना होने पर 10 दिवस उपरांत उग्र आंदोलन में जा सकते है।
आज के आंदोलन में क्षेत्रीय किसान अनुजसिंह सक्सेना,केशरी साहू,रामकली कर्वेती,रेखा ठाकुर ,राजकुमार धुर्वे,लखन सिंह डेहरिया,राजेन्द्र कंगाली,सुरमन साहू महेंद्र सिंह उर्फ मोनू राय बलपान ठाकुर,रामकृष्ण ठाकुर व अन्य की प्रमुख भूमिका रही है।

पानी दो या जहर दो के नारे के साथ गूँजा धरना स्थल
ओबीसी महासभा सँयुक्त किसान मोर्चा के सँयुक्त जिला प्रवक्ता राजेश पटेल ने बताया की किसानों में अपने हित अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। राष्ट्रीय किसान आंदोलन की वजह से स्थानीय व प्रदेश के मुद्दे पर किसान संगठनों का संघर्ष कमजोर रहा है वही विपक्षी राजनीतिक दल भी निष्क्रिय दिखाई दे रहे है ।किसानों के सहारे अपना राजनीतिक अस्तिव बगैर संघर्ष के बनाना चाहते है। आगामी समय मे किसान और किसान संगठनों का समन्वय मजबूत लड़ाई के लिए तैयार है और इसी की यह वानगी आज से शुरु हो गई है।

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