धौलपुर में फर्जी टर्नओवर सर्टिफिकेट से टेंडर लेने का मामला उजागर, PWD की भूमिका पर सवाल
धौलपुर/
धौलपुर जिले में सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) के ठेकों में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि ठेकेदार कुर्बान खान ने फर्जी एवं बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाए गए टर्नओवर सर्टिफिकेट के आधार पर वर्षों से सरकारी टेंडर हासिल किए, जबकि विभागीय अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी मौन बने रहे।

प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार, चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म “विष्णु राम एंड एसोसिएट्स” द्वारा अलग-अलग समय पर जारी किए गए टर्नओवर प्रमाण-पत्रों में एक ही वित्तीय वर्षों के लिए अलग-अलग आंकड़े दर्शाए गए हैं, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच में सामने आया बड़ा अंतर
दिनांक 12 नवंबर 2024 को जारी टर्नओवर सर्टिफिकेट में वित्तीय वर्ष 2021-22 का टर्नओवर ₹9.01 करोड़ और 2022-23 का ₹8.96 करोड़ दर्शाया गया।
जबकि PWD भरतपुर जोन द्वारा जांच पत्र जारी किए जाने के बाद, उसी CA फर्म ने 17 दिसंबर 2025 को भेजे गए स्पष्टीकरण पत्र में इन वर्षों का वास्तविक टर्नओवर क्रमशः ₹7.02 करोड़ और ₹8.13 करोड़ बताया।
यानी—
2021-22 में करीब ₹1.98 करोड़
2022-23 में करीब ₹83 लाख
का टर्नओवर पहले से अधिक दिखाया गया।
PWD ने मांगी थी जांच, फिर भी कार्रवाई नहीं
धौलपुर डिवीजन के एक टेंडर में शिकायत मिलने पर PWD भरतपुर जोन ने CA फर्म से टर्नओवर सर्टिफिकेट की प्रमाणिकता की जांच के लिए पत्र जारी किया था। इसके जवाब में CA द्वारा “गलती” स्वीकार करते हुए संशोधित आंकड़े भेजे गए, लेकिन इसके बावजूद न तो ठेकेदार पर कोई तत्काल कार्रवाई हुई और न ही संबंधित अधिकारियों पर।
टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि टर्नओवर सरकारी टेंडरों की पात्रता का मुख्य आधार होता है। ऐसे में आंकड़े बढ़ाकर दिखाना सीधे-सीधे टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करता है। यह मामला केवल एक ठेकेदार तक सीमित नहीं, बल्कि विभागीय मिलीभगत की ओर भी इशारा करता है।
सरकार की छवि पर असर
स्थानीय स्तर पर यह मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार और PWD विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इससे सरकार की भ्रष्टाचार-मुक्त छवि को नुकसान पहुंचेगा।
मांग—ब्लैकलिस्टिंग और कड़ी कार्रवाई
प्रकरण को देखते हुए मांग की जा रही है कि—
ठेकेदार कुर्बान खान को ब्लैकलिस्ट किया जाए,
फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर लिए गए टेंडरों की पुनः जांच हो,
संबंधित PWD अधिकारियों की विभागीय व कानूनी जांच कराई जाए,
अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री और सार्वजनिक निर्माण विभाग इस गंभीर मामले पर क्या रुख अपनाते हैं। ब्यूरो चीफ धौलपुर