जगन फ़ाउंडेशन और द आज़ादी प्रोजेक्ट ने राजस्थान के विद्यालयों में जेंडर सेंसिटिव सिटिज़नशिप पर पायलट कार्यक्रम शुरू किया

जगन फ़ाउंडेशन और द आज़ादी प्रोजेक्ट ने राजस्थान के विद्यालयों में जेंडर सेंसिटिव सिटिज़नशिप पर पायलट कार्यक्रम शुरू किया

 यह कार्यक्रम युवाओं को “जेंडर लीडर” बनाने का लक्ष्य रखता है, ताकि वे लैंगिक भेदभाव को पहचानने और उसका सामना करने की क्षमता विकसित कर सकें।

 

धौलपुर, राजस्थान – जगन फ़ाउंडेशन ने, द आज़ादी प्रोजेक्ट के सहयोग से, धौलपुर के दो विद्यालयों में जेंडर सेंसिटिव सिटिज़नशिप (GSC) शीर्षक से एक पायलट कार्यक्रम की शुरुआत की घोषणा की है। यह पहल गहराई से जड़ जमाए हुए लैंगिक पूर्वाग्रहों को चुनौती देने और संरचित सेंसिटाइज़ेशन तथा नेतृत्व कार्यशालाओं के माध्यम से किशोरों में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखती है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम द्वारा जारी 2025 ग्लोबल जेंडर गैप इंडेक्स के अनुसार, भारत 146 देशों में से 131वें स्थान पर है, जो सामाजिक एवं शैक्षिक संस्थानों में लगातार बनी हुई लैंगिक असमानताओं को उजागर करता है। इसके जवाब में, GSC कार्यक्रम 8–16 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों पर केंद्रित है, जो वह अहम दौर है जब जेंडर भूमिकाओं और समानता के बारे में धारणाएँ बनना शुरू होती हैं।

जगन फ़ाउंडेशन के संस्थापक दुश्यंत शर्मा ने कहा, “जेंडर-सेंसिटिव नागरिक बनाने की शुरुआत प्रारंभिक उम्र में संवाद और जागरूकता से होती है। यह कार्यक्रम युवाओं को अपने समुदायों के भीतर समानता के चैम्पियन बनने में सक्षम बनाता है।”

सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय लुहरी के प्राचार्य अम्बरीश चौधरी ने कहा, “हम धौलपुर में इस जेंडर सेंसिटिव सिटिज़नशिप कार्यक्रम को जगन फ़ाउंडेशन और द आज़ादी प्रोजेक्ट के साथ मिलकर शुरू करने वाले मॉडल स्कूल बनने पर खुशी महसूस करते हैं। आज के उद्घाटन सत्र में हमने विद्यार्थियों में बहुत सकारात्मक ऊर्जा और आशा देखी है।”

जनवरी 2026 से शुरू हो रहे इस 12-सप्ताही पायलट में जेंडर संबंधी रूढ़िवादी धारणाओं, समानता और समावेशन पर इंटरैक्टिव वर्कशॉप, रोल-प्ले सेशन और चिंतनशील चर्चाएँ शामिल होंगी। सत्र धौलपुर के एक उच्च माध्यमिक विद्यालय और एक माध्यमिक विद्यालय में आयोजित किए जाएँगे।

ट्रेन-द-ट्रेन्‍र्स (ToT) मॉडल पर आधारित यह कार्यक्रम प्रतिभागी विद्यार्थियों और युवा नेतृत्व को इस प्रकार तैयार करेगा कि वे अपने विद्यालयों और समुदायों में आगे चलकर सहपाठी-नेतृत्व वाले वर्कशॉप और संवाद चला सकें, जिससे कार्यक्रम की स्थिरता और स्थानीय स्वामित्व सुनिश्चित हो सके।

सहयोग पर टिप्पणी करते हुए, द आज़ादी प्रोजेक्ट की संस्थापक और एग्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर प्रियाली सुर ने कहा, “ऐसी साझेदारियाँ हमें क्षेत्रीय समुदायों के युवा स्वरों तक पहुँचने और जमीनी स्तर से जेंडर-सचेत नेतृत्व को बढ़ावा देने में मदद करती हैं।”

यह कार्यक्रम लिब्रा फ़िलान्थ्रॉपीज़ के सहयोग से संचालित हो रहा है। पायलट चरण के बाद, जेंडर सेंसिटिव सिटिज़नशिप कार्यक्रम को राजस्थान के विद्यालयों में दो वर्ष की विस्तृत पहल के रूप में विस्तार दिया जाएगा, जिसका उद्देश्य ऐसे सुरक्षित और समावेशी शैक्षिक वातावरण बनाना है जहाँ लड़के और लड़कियाँ समान नागरिकों की तरह सीख सकें, सवाल पूछ सकें और आगे बढ़ सकें। ब्यूरो चीफ धौलपुर

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