49 की बदहाली पर जनता में तीव्र असंतोष, जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल

ओड़िशा प्रदेश की झारसुगुड़ा जातीय राजमार्ग-
49 (NH-49) की दयनीय स्थिति को लेकर झारसुगुड़ा जिले में व्यापक असंतोष देखा जा रहा है। सड़क की खस्ताहाल हालत के कारण आए दिन हो रही दुर्घटनाओं से आमजन में भय और आक्रोश का माहौल है। हाल ही में 22 जनवरी को हुए दर्दनाक हादसे में 5 पुलिसकर्मियों की मौत के बाद यह मुद्दा और भी गंभीर हो गया है।झारसुगुड़ा जिले तथा ब्रजराजनगर क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि वर्तमान एवं पूर्व सांसदों तथा मंत्रियों द्वारा इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग के स्थायी सुधार के लिए कोई ठोस पहल नहीं की गई।
हाईवे का इतिहास और राजनीतिक पृष्ठभूमि वर्ष 2002 में केंद्र में भाजपा सरकार के दौरान देवेंद्र प्रधान केंद्रीय परिवहन मंत्री बने थे। उसी समय इस मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग 200 घोषित किया गया।
इसके बाद 2004 में धर्मेंद्र प्रधान सांसद निर्वाचित हुए। वर्ष 2007 में इस सड़क को बिलासपुर से चांदिखोल तक विस्तारित कर NH-49 घोषित किया गया और चौड़ीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई।
इसके पश्चात विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे, जिनमें संजय भोई, प्रभास सिंह, सुरेश पुजारी तथा वर्तमान सांसद प्रदीप पुरोहित शामिल हैं।
हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से फाइलों, सर्वे और डीपीआर के नाम पर समय व्यतीत होता रहा, लेकिन चार-लेन निर्माण और समुचित मरम्मत कार्य अब तक अधूरा है।
जनता में बढ़ता असंतोष
स्थानीय बुद्धिजीवियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जिले में प्रभावशाली नेताओं की मौजूदगी के बावजूद सड़क की स्थिति में सुधार नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है। आए दिन हो रहे हादसों से आमजन की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।
चुनावी प्रभाव की संभावना
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह मुद्दा आगामी पंचायत एवं आम चुनाव में प्रमुख चुनावी विषय बन सकता है। जनता अब विकास और सुरक्षा के मुद्दे पर स्पष्ट जवाब चाहती है झारसुगुड़ा से सुमित्रा देबी की रिपोर्ट आर 9भारत