युवाओं को सही दिशा देकर विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है –

चित्रलेखा श्रीवास की रिपोर्ट
युवाओं को सही दिशा देकर विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है –
डा.विदुषी शर्मा

 

करतला -“युवाओं को सकारात्मक दिशा की ओर प्रेरित करते हुए उनके कौशल और बुद्धिमत्ता को विकसित भारत 2047 के लिए प्रमुखता से तैयार किया जा सकता है। और यदि इस काम को हम कर लिए तो निश्चित तौर पर हमारा युवा भारत 2047 में एक विकसित राष्ट्र के रूप में पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान बनाएगी। अतः हम सभी एक साथ इस महान लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपने कर्तव्यों का अपने-अपने जगह पर संकल्प पूर्वक निर्वहन करें।” उक्त उद्गार शासकीय महाविद्यालय करतला एवं शासकीय नवीन महाविद्यालय रामपुर के संयुक्त तत्वाधान में ‘विकसित भारत 2047- नवाचार,आत्मनिर्भरता एवं समावेशी विकास’ पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में प्रथम तकनीकी सत्र के स्रोत व्यक्ति एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित अतिथि वक्ता डॉ.विदुषी शर्मा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय दिल्ली की काउंसलर ने व्यक्त किया। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि जुड़ावन सिंह ठाकुर प्रांत प्रमुख विद्या भारती ने अपने उद्बोधन में कहा कि – “भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय संस्कृति की मूल अवधारणा को अपनाकर भारत को विश्व स्तर पर एक नई पहचान दिलाया जा सकता है। अतः हमें विकसित भारत 2047 के लिए शिक्षा में आधुनिकता के साथ-साथ परंपरागत मूल्यों को भी सम्मिलित करना होगा।” कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि अशोक कुमार तिवारी वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि “जब हम राष्ट्रीय एकता और अखंडता के साथ युवाओं को उनकी वास्तविक कुशलता से परिचय कराते हुए उनका सदुपयोग करें तो विकसित भारत के मुख्य बिंदु नवाचार,आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास को जल्द से जल्द प्राप्त किया जा सकता है।” उद्घाटन सत्र के अध्यक्ष महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. मृगेश कुमार यादव ने अतिथि स्वागत और धन्यवाद के शब्द कहते हुए कहा कि “आज हम आर्थिक प्रबंधन के साथ-साथ सामाजिक,सांस्कृतिक और पर्यावरण प्रबंधन करके विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।” कार्यक्रम के प्रारंभ में इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ.संजय कुमार यादव ने विषय की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि – “यह संगोष्ठी दूरस्थ जनजाति क्षेत्र में पहली बार आयोजित हो रहा है और इसलिए समस्त अतिथियों का वक्ताओं का यहां आना महाविद्यालय परिवार के लिए सौभाग्य की बात है।” द्वितीय तकनीकी सत्र के स्रोत व्यक्ति विषय विशेषज्ञ प्रोफेसर प्यारेलाल आदिले ने विकसित भारत 2047 के लिए मानवीय मूल्य और सांस्कृतिक विरासत को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि – “आज हम यदि अच्छे और आदर्श मानव होने के गुणों को आत्मसात अपने कर्म क्षेत्र में करेंगे तो निश्चित तौर पर हमारा देश विश्व में अग्रणी भूमिका निभा सकता है।”प्रथम तकनीक सत्र के चेयर पर्सन डॉ.मनोज कुमार झा एवं द्वितीय तकनीकी सत्र के चेयर पर्सन डॉ.श्याम सुंदर तिवारी तथा दोनों तकनीकी सत्र के सहायक चेयर डॉ.प्रीतिलता मिंज ने किया। दोनों तकनीकी सत्रों में शोध पत्रों का वाचन विभिन्न संस्थाओं से आए शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों ने किया। कार्यक्रम का संपूर्ण संचालन डा.सपना मिश्रा ने किया। उल्लेखनीय है कि यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी कोरबा जैसे औद्योगिक जिला के दूरस्थ अंचल में स्थित महाविद्यालय में सफलतापूर्वक आयोजित हो रहा है। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्राध्यापक,विषय विशेषज्ञ,शोधार्थी,विद्यार्थी के अतिरिक्त ग्राम के गणमान्य नागरिक एवं युवा भी उपस्थित रहे।

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