स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में संभाग में मिला दूसरा स्थान, धरातल पर शून्य ——–
पूर्व विधायक का गांव अम्बरपुर की सड़के बनी दरिया, नारकीय जीवन जीने की मजबूरी—–

राजाखेड़ा-: राजाखेड़ा नगर पालिका के वार्ड नंबर 2, 3 ,4 अम्बरपुर में मेंन रोड एवं बाल्मिक मोहल्ले की सड़के अतिरिक्त व गंदे जल की निकासी न होने से दरिया का रूप ले चुकी हैं ।जबकि यह मार्ग राजाखेड़ा को उत्तर प्रदेश की सीमा से जोड़ता है । यह हालात तो तब है जब स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में राजाखेड़ा नगर पालिका ने शानदार प्रदर्शन करते हुए संभागीय रैंकिंग में दूसरा स्थान हासिल किया है। यह उपलब्धि नगर पालिका के सफाई कर्मियों की कड़ी मेहनत, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन की बदौलत संभव हुई है। जबकि धरातल पर देखा जाए तो नगर पालिका में स्वच्छता सर्वेक्षण के तहत जमीनी हालातों में शून्य दिखाई देते है। शहरी छेत्र नगर पालिका के वार्ड नंबर 2,3,4 अम्बरपुर में भारतीय जनता पार्टी की पूर्व विधायिका मनोरमा सिंह का पैतृक गांव है जहां की सड़के बनी गंदे पानी का दरिया का रूप ले चुकी हैं। विद्यालय के लिए जान वाले नन्हे मुन्ने छात्र-छात्राएं इन स्थितियों में बड़ी मशक्कत का सामना करने को मजबूर है। वहीं स्थानीय निवासियों का जीवन भी नारकीय बना हुआ हे । आम रास्ते की नालियां सफाई के अभाव में सिल्ट से चौक होकर पानी का निकास करने की जगह सड़को पर ओवेरफ्लो कर देती हैं। ऐसे में स्वच्छता सर्वेक्षण केवल फाइलों में ही दूसरा स्थान प्राप्त करता दिखता है। स्थानीय नगर पालिका को केंद्र सरकार की स्वच्छता रैकिंग में संपूर्ण राजस्थान जिसमें नगर निगम, परिषद एवं सभी नगर पालिका शामिल रहीं 16वीं रैंक मिली है, इसी के साथ संपूर्ण भारत की शहरी निकायों में 280 की रैंक मिली है जो राजाखेड़ा शहर के लिए सम्मान की बात है। भरतपुर संभाग में नगर निगम भरतपुर के बाद राजाखेड़ा नगर पालिका को दूसरा स्थान मिला है इसके साथ ही 3 स्टार रेटिंग में संपूर्ण राजस्थान में 20 से 50 हजार की आबादी में पालिका पहले स्थान पर रही है जिसका समस्त श्रेय नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों की मेहनत, डोर टू डोर कचरा संग्रहण की फर्म उड़ान इंडिया को जाता है। स्थानीय नगर पालिका के पास संभाग का सबसे उन्नत डंपयार्ड और एक अत्याधुनिक एफ एस टी पी प्लांट है, जो अपशिष्ट प्रबंधन में इसकी दक्षता को दर्शाता है। डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और नागरिक जागरूकता अभियानों ने भी इस सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। नगर पालिका राजाखेड़ा ने 68 नए सफाई कर्मचारियों को जॉइनिंग देकर राजाखेड़ा नगर पालिका क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को दुरुस्त कराने के लिए प्रयास किये जबकि नगर पालिका राजाखेड़ा में पूर्व में 46 सफाई कर्मचारि ही कार्यरत है।
आखिर कब तक जमादार जमकर बैठे ऑफिस में, फिर कैसे हो सफाई
सरकार के दिशानिर्देशों को धता बताते हुए कुछ जमादारों को तो प्रशासनिक अधिकारियों ने जमादारों को कार्यालय कुर्सिया प्रदान कर दी है ओर उनको मंत्रालयिक कार्यो में लगा रखा है।जो नियुक्ति से अब तक कभी सफाई कार्य मे गए ही नहीं। नगरपालिका सफाई कर्मचारी मनोज कुमार ने बताया की कुछ जमादार तो हाजिरी देने के लिए भी समस्त कर्मचारी एवं जमादारों के साथ नहीं आते हैं वह अपनी मर्जी से ही आते जाते हैं। राजाखेड़ा नगर पालिका में दो कनिष्ठ पद होने पर भी जमादारों को स्टोर चार्ज, रोकड़ शाखा जैसे अन्य महत्वपूर्ण चार्ज दे दिए गए हैं तो फिर नगर पालिका में कनिष्ठ लिपिक के पदों को रखने की जरूरत क्यों पड़ी । ओर अगर कनिष्ठ लिपिक पद है तो जमादारों को राजनीतिक संरक्षण में उच्च पद देकर उपकृत क्यो किया गया है। जो अपनी मनमर्जी से नोकरी करते है। कल शनिवार को देखा गया कि हाजिरी के समय एक भी जमादार नगर पालिका में नहीं था संवाददाता मनोज राघव राजाखेड़ा