बाँदा। योगी सरकार ने गायो को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने के लिए गौशालाएं खुलवाई ,लेकिन गौशालाएं गौवंशो के लिये मौत शाला बन गई है

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बाँदा। योगी सरकार ने गायो को सुरक्षित एवं संरक्षित रखने के लिए गौशालाएं खुलवाई ,लेकिन गौशालाएं गौवंशो के लिये मौत शाला बन गई है। प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते अफसर गौवंशो का धन बंदर बांट कर अपनी तिजोरी भर रहे है। जिससे गौवंश गौशालाओं में भूख से तड़प तड़प कर मर रहे है।
बाँदा जनपद के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में बनी अस्थायी गौशालाओं की हालत बद से बदतर है। गौवंशो के खाने पीने का सही ढंग से इंतजाम नही किया जा रहा है। बल्कि एक एक सप्ताह गौवंशो को भूखा भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है। वही गौवंशो के भरण पोषण के लिए सरकार से मिलने वाली धनराशि को अधिकारी प्रतिनिधि बंदर बांट कर अपनी तिजोरी भरने में लगे है। भूख प्यास से तड़पते गौवंशो की हालत देखी नही जा रही है। हालांकि आला अफसरों से शिकायत करने पर कार्यवाही नही की जाती है। बल्कि शिकायत कर्ता के ऊपर फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है। जिससे लोगो के मुंह बंद हो जाते है। कोई शिकायत करने का साहस नही कर पा रहा है। जिसकी वजह से ग्राम प्रतिनिधि एवं सचिव मनमानी करने में उतारू है। जिससे अस्थायी गौशालाओं में गौवंशो की संख्या आधी से कम बची हुए है। फिलहाल कागजो में संख्या अधिक दर्ज कराकर गौवंशो का हक सरेआम डकार रहे है। क्षेत्रीय प्रतिनिधियों को गौवंशो की दयनीय हालत जानने के लिए फुरसत नही है। जिससे गौशालाएं कसाई खाना बन गई है।
गौवंश भूख व प्यास से तड़प तड़प कर मर रहे है। जिंदा गौवंशो को कौवे नोच-नोच खा रहे हैं, वही मृतक गौवंशो को सचिव व प्रधान द्वारा बिना पोस्टमार्टम करवाये चुप चाप फेंकवा दिया जाता है। ताकि किसी को भनक न लग सके। बानगी के तौर पर ताजा मामला विकासखंड नरैनी महुटा ग्राम पंचायत में बने अस्थाई गौशाला का सामने आया है, जहाँ पर आज मँगलवार को सायँकाल करीब चार बजे तक मे भूख और प्यास से तड़प तड़प कर दो गौवंशो ने दम तोड़ दिया। वही करीब तीन से चार गाय जीर्ण शीर्ण अवस्था में जमीन में पड़ी जिंदगी और मौत जूझ रही है। गौशाला कर्मी छोटू सिंह ने बताया कि केवल लाही का भूसा यदा कदा खिलाया जाता है प्रधान व सचिव मिल कर गायो के हक को डकार रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि कोई अधिकारी अस्थायी गौशालाओं को झांकने नही आता है। जिससे प्रधान सचिव और मनमानी कर रहे है, शिकायत की जाती है तो कोई अधिकारी सुनता भी नही है। इसलिए कोई प्रधान सचिव के विरुद्ध मुंह खोलने को तैयार नही है।
फिलहाल ग्रामीणों ने बदहाल अस्थायी गौशालाओं में भूख से तड़प तड़प मर रहे गौवंशो को बचाने के लिए आलाअफसरों का ध्यान आकृष्ट कराया है।

बाँदा जिला संवाददाता R9 भारत से शिवविलाश शर्मा की रिपोर्ट।

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