बिना संसाधन उपलब्ध कराए जबरदस्ती शिक्षकों की निष्ठा पर संदेह करते हुए.

वीडियो कॉलिंग वॉइस कॉलिंग के माध्यम से निगरानी किए जाने संबंधी आदेश को निरस्त किए जाने हेतु उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ ने दिया ज्ञापन,, संघ ने अपने ज्ञापन के माध्यम से कहा है कि महानिदेशक महोदय स्कूल शिक्षा उत्तर प्रदेश द्वारा 24 अप्रैल 2023 के पत्रांक के माध्यम से प्रदेश के समस्त प्राचार्य को एक कमेटी गठित करके प्रदेश के बेसिक शिक्षकों का अनुश्रवण वीडियो काल तथा वायस काल से करने के निर्देश दिए गए हैं इस व्यवस्था तथा इसके पूर्व वर्ष 2019 से कराए जा रहे ऑनलाइन विभागीय कार्यों जिसमें तमाम ऐसे ऐप को भय का वातावरण कायम कर के शिक्षकों के निजी मोबाइल निजी नेट निजी सिम से कराया जा रहा है इसके लिए विभाग से प्रदेश के बेसिक शिक्षकों को आज तक एक भी पैसा नहीं दिया गया है विभाग में 50% शिक्षिकाएं हैं तथा 12 वर्ष से कम अथवा 12 वर्ष से अधिक के बच्चे पढ़ते हैं नियमानुसार उनकी फोटो प्रदर्शित नहीं की जा सकती परंतु उक्त आदेश के माध्यम से बेसिक शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं को बच्चों से वीडियो कॉलिंग से बात करके निजता का हनन करने का नियम विरुद्ध आदेश किया गया है विभाग के उच्च अधिकारी नियमों शासनादेशों के विरुद्ध जाकर आदेश कर रहे हैं जिससे शिक्षक प्रताड़ित हो रहा है जबकि शिक्षकों की समस्याओं का निदान किए जाने की ओर किसी भी विभागीय अधिकारी का ध्यान नहीं है जबकि वर्षों से पदोन्नत जिले के अंदर तथा जिले के बाहर स्थानांतरण नहीं हुए हैं ऐसी ही सैकड़ों जायज समस्याएं शिक्षकों की लंबित है जिन पर कभी विभाग के उच्च अधिकारी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं कुछ अधिकारी मनमाने आदेश करके प्रदेश की संवैधानिक संस्था बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश को समाप्त करने का प्रयास कर रहे हैं जो कि उचित नहीं है किसी भी विभागीय शासनादेश आदेश को जारी करने से पूर्व उससे संबंधित प्रस्ताव बेसिक शिक्षा परिषद में विचार करके लिया जाना चाहिए, परिषद की बैठक में पारित होने के पश्चात होना चाहिए और स्वीकृति के उपरांत वह शासनादेश के रूप में आना चाहिए परंतु ऐसा न करके सीधे तौर पर आदेश निर्गत किए जाते हैं और यह एक विभागीय मनमानी और तानाशाही पूर्ण रवैया है जिसे अब शिक्षक स्वीकार करने को तैयार नहीं है प्रदेश सरकार द्वारा बेसिक शिक्षा विभाग में तीन संगठनों को मान्यता प्रदान की गई है तथा परिषद का सदस्य नामित किया गया है परंतु संगठनों से किसी प्रकार की कोई सलाह ना लेकर सीधे तौर पर आदेश थोपने का काम किया जा रहा है तथा उनकी निगरानी चोरों की तरह करके चोर साबित करने का एक प्रयास है जबकि प्रदेश का बेसिक शिक्षक सैकड़ों गैर शैक्षणिक कार्य करते हुए भी बेसिक शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है परन्तु इस प्रकार के आदेशों से शिक्षक का मनोबल गिर रहा है तथा हतोत्साहित हो रहा है प्रदेश के बेसिक शिक्षकों ने तय किया है कि अब कोई भी शिक्षक विभागीय कार्य अपने निजी संसाधन से नहीं करेंगे जो उनके पास एंड्रॉयड फोन है उसका प्रयोग नहीं करेगा तथा विभागीय सूचना के आदेश प्रदान हेतु कीपैड वाला मोबाइल अपने पास रकहेगा,आदेश में यह भी कहा गया है कि कोई भी शिक्षक तीन बार कॉल आने के बाद भी यदि कॉल रिसीव नहीं करेगा तो उसके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी पर वो जानना चाहता है कि यदि कोई विभागीय अधिकारी को कॉल करेगा और अधिकारी कॉल रिसीव नहीं किये तो उन पर भी यही नियम लागू होगा । कोई भी संसाधन विभाग से उपलब्ध कराए बिना ही केवल भयभीत करके विभागीय अधिकारी शिक्षकों से कार्य करा रहे हैं जिससे भय के वातावरण में शिक्षक स्वतंत्र रूप से कार्य नहीं कर पा रहा है भय दिखा कर डराया तो जा सकता है परंतु कार्य मानोयोग से नहीं कराया जा सकता।सघन निरीक्षण के नाम पर ब्लॉक से लेकर प्रदेश स्तर के अधिकारी शिक्षकों को प्रताड़ित करने का कार्य कर रहे हैं उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश ने अपने ज्ञापन में यह अनुरोध किया है कि उपरोक्त आदेश को निरस्त करने का कष्ट करें अन्यथा बाध्य होकर प्रदेश का शिक्षक ऐसे नियम विरुद्ध आदेशों के विरुद्ध शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए बाध्य होगा। यह ज्ञापन उत्तर प्रदेश सरकार माननीय मुख्यमंत्री ,बेसिक शिक्षा मंत्री, मुख्य सचिव ,अपर मुख्य सचिव ,बेसिक शिक्षा उत्तर प्रदेश, राज्य अभिसूचना इकाई, महानिदेशक, शिक्षा निदेशक, सचिव को नामित है जिस पर महानिदेशक विजय किरण आनंद ने वीडियो कॉलिंग सम्बन्धी आदेश पर जोर न देने का भरोसा दिया तथा इसे वापस लेने पर भी सहमत हुए।

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