भगवान कृष्ण के गमन पथ को जल्दी ही तीर्थ स्थलों के रूप में किया जाएगा विकसित…. भजनलाल शर्मा

भरतपुर 27 अगस्त

भगवान कृष्ण के गमन पथ को जल्दी ही तीर्थ स्थलों के रूप में किया जाएगा विकसित…. भजनलाल शर्मा

भगवान कृष्ण की जन्म स्थली मथुरा से लेकर शिक्षा स्थली उज्जैन को 525 किलोमीटर लंबे धार्मिक सर्किट से जोड़ा जाएगा

 

भरतपुर. भगवान कृष्ण की जन्म स्थली मथुरा से लेकर उनकी शिक्षा स्थली उज्जैन को धार्मिक सर्किट के जरिए जोड़ा जाएगा। यह धार्मिक सर्किट करीब 525 किलोमीटर का हो सकता है। यह सर्किट राजस्थान और मध्यप्रदेश सरकार मिलकर बनाएगी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने श्रीकृष्ण गमन पथ बनाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और उनकी पत्नी गीता शर्मा सोमवार को डीग जिले के पूंछरी का लौठा पहुंचे थे। यहां उन्होंने श्रीनाथजी के मंदिर और मुकुट मुखारबिंद की पूजा-अर्चना की। इसके बाद शर्मा उज्जैन पहुंचे। भजनलाल शर्मा ने कहा कि भगवान कृष्ण के गमन पथ को जल्दी ही तीर्थ स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा। मध्यप्रदेश के उज्जैन के सांदीपनि में भगवान कृष्ण ने शिक्षा हासिल की है। जानापाव (एमपी) में भगवान परशुराम ने उन्हें सुदर्शन चक्र दिया। धार के पास अमझेरा में भगवान का रुक्मिणी हरण को लेकर युद्ध हुआ। ऐसे स्थलों को सरकार पर्यटन स्थल बनाने जा रही है। माना जा रहा है कि श्रीकृष्ण गमन पथ में राजस्थान के भरतपुर जिले का कुछ हिस्सा भी शामिल होगा। सीएम ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण मथुरा से भरतपुर, कोटा, झालावाड़ के रास्ते छोटे-छोटे गांवों से होते हुए उज्जैन पहुंचे थे। हमने उनकी राह में पड़ने स्थानों को चिह्नित कर लिया है। उन सभी धार्मिक स्थानों को एमपी और राजस्थान सरकार जोड़ेगी। कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश से सटे राजस्थान (डीग) के एक गांव (बहज) में जमीन के नीचे पूरा गांव मिला था। खुदाई के दौरान कई हजारों साल पुराने हड्डियों के अवशेष, बर्तन, मूर्तियां मिली थीं। जहां ये गांव मिला, वो इलाका ब्रज यानी भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली से जुड़ा हुआ है। यह गोवर्धन से महज 11 किलोमीटर दूर है। मान्यता है कि खुदाई में मिली चीजों का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के काल से है। भगवान कृष्ण स्वयं गाय चराने के दौरान बहज क्षेत्र तक विचरण करने आते थे। बहज गांव में स्थित टीला 5500 साल से भी पुराना है। बहज गांव 84 कोस परिक्रमा में भी आता है। गांव में यह मान्यता है कि जब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाया था, उस दौरान ग्वालों के साथ बहज गांव के लोग भी थे। जो बारिश से बचने के लिए गोवर्धन पर्वत के नीचे छिपे थे।।

भरतपुर से हेमंत दुबे

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