कालांतर में इसका पुन: निर्माण किया गया। अब पुनः भव्य मंदिर देखने में लग रहा है। हालांकि मंदिर बगीचा के प्रांगण में है। तत्पश्चात चारों ओर से सड़क का निर्माण किया गया। अब वह मंदिर स्वर्ग के ऐसा दिखने लगा। प्रांगण में प्रत्येक दिन सैकड़ों की भीड़ में जूटे रहते हैं वहां के श्रद्धालु, ग्रामीणों के सहयोग से बनाया गया भव्य मंदिर।

मान्यताओं के अनुसार यहाँ के पवित्र कुएँ से दूध निकलने की घटना हो चुकी है। इस मंदिर का निर्माण में वहां के स्थानीय ग्रामीणों के द्वारा भव्य मंदिर निर्माण किया गया। साथ ही इस मंदिर का धीरे धीरे प्रचलित होने लगा। मां डाकिनी मंदिर में गाली देने की परंपरा आज तक चल रही है। इस मंदिर में सोमवार एवं शुक्रवार को बली व पूजा करने की आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस मंदिर में कई जिलों से भक्तों पहुंचते हैं।

साथ ही मनकामना पूर्ण होने पर बलि दिया जाता है। मां डाकिनी मंदिर में सरकारी योजनाओं का भी लागत लगाया गया है। वही स्थानीय ग्रामीण ने बताया कि जिस महिलाओं को संतान की प्राप्ति नहीं होती है। सच्चे मन से सच्चे दरबार में पहुंचने से मनोकामना पूर्ण होती है। साथ ही वही के स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि बीमारी हो केस मुकदमा हो किसी भी प्रकार की मन्नत मांगने से मनोकामना पूर्ण होती है। वहीं इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि कुआं का जल दूध के सम्मान दिखता है। इस मंदिर का स्थापना 1348 ई हुआ था। मगर वहां के ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का भव्य निर्माण किया गया। धीरे धीरे दूर दराज के लोग इस मंदिर को जानने लगा।