माई की रसोई के सफलतम 9 वर्ष पूर्ण, संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ का हुआ आयोजन

माई की रसोई के सफलतम 9 वर्ष पूर्ण, संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ का हुआ आयोजन

माँ नर्मदा की विशेष पूजा अर्चना के साथ भंडारा और महाप्रसाद का हुआ वितरण

R9 भारत संवाददाता
छत्रपाल मरावी ब्यूरो क्राइम मंडला

मंडला:- कोरोना कॉल का लॉक डाउन हो फिर होली दीवाली की छुट्टी, देश व्यापी बन्द का समय या फिर हड़ताल लेकिन मण्डला के रपटा घाट की एक ऐसी रसोई है जहां बीते 9 सालों में न कभी ताला लगा और न ही कभी यहाँ से कोई जरूरत मंद या भूखा वापस गया,कोरोना महामारी के कारण हुए लॉक डाउन के समय तो इस रसोई के द्वारा किये गए कार्यों को लोगों ने खूब सराहा और जरूरतमंदों ने दिल से दुआएं दी क्योंकि जब सारे ठिकाने बंद थे तब यह गरीबों और भूखों के भरपेट भोजन का सबसे बड़ा सहारा थी और वो भी बिना किसी सरकारी या निजी सहायता के,पूरी तरह से निशुल्क सेवा की मिसाल ।

रात को कोई भी बेसहारा भूखा ना सोए इसके लिए माई की रसोई मददगार बनी हुई है साल के 365 दिन शाम को बेसहारो को भोजन कराने का क्रम 9 साल से अनवरत जारी है प्रतिदिन 60 से 70 बेसहारा लोग भरपेट भोजन कर चैन की नींद सो रहे हैं ।

माई की रसोई के सफलतम 9 वर्ष पूर्ण

रपटा घाट पर रहने वाले गरीबों की जरूरत को देखते हुए नर्मदा जन कल्याण समिति के सदस्यों द्वारा सामूहिक रूप से माई की रसोई की शुरुआत 28 दिसंबर 2012 को की गई थी प्रतिदिन 60 से 70 लोगों को खिचड़ी तैयार कर परोसकर भरपूर भोजन कराया जा रहा है यह क्रम साल के 365 दिन जारी रहता है माई की रसोई में प्रतिदिन तैयार होने वाली खिचड़ी 17 प्रकार के अनाज से बनती है खिचड़ी तैयार कर सदस्य शाम को रपटा घाट में नर्मदा की पूजा अर्चना करते हैं यहां जरूरतमंद के साथ अन्य लोग भी बैठकर भोजन करते हैं ।

28 दिसंबर 2021 को हुए 9 साल पूरे

सन 2012 से अनवरत जारी इस रसोई में आज 9 साल पूरे कर लिए हैं इस अवसर पर आज प्रथ रपटा घाट स्थित श्री हनुमान लाला को चोला अर्पण किया गया , दोपहर भव्य संगीतमय सुन्दरकाण्ड पाठ का आयोजन सुन्दर कांड भजन मंडली देवदरा द्वारा किया गया। जिसमें भोला ठाकुर एवं उनकी भजन मंडली द्वारा पाठ पढ़ा गया। तत्पश्चात माँ नर्मदा का पूजन किया गया और महा प्रसादी वितरण किया गया। आयोजन के दौरान कोरोना गाइडलाइन का पालन किया गया। खास बात यह है कि किसी भी तीज त्यौहार या अन्य मौकों पर भी यह रसोई कभी बंद नहीं हुई है। इस रसोई में काम करने वाली समिति के सदस्य बताते हैं कि चाहे हमारी कितनी भी जरूरी काम हो पर हम रसोई बंद नहीं होने देते। विगत 9 वर्षों से हमारी रसोई से आज तक कोई भी भूखा नहीं लौटा है ना ही रसोई में कभी ताला लगा है।

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