रायसेन के बंदोबस्त 2013-14 में राजस्व रिकॉर्ड में की बड़ी हेराफेरी,जमीनों के नक्शे छुपा कर राजस्व रिकार्ड करने का बड़ा मामला हुआ उजागर

जिला-रायसेन मध्य प्रदेश
रिपोर्ट-राहुल राजौरिया
मो-9424030592

रायसेन के बंदोबस्त 2013-14 में राजस्व रिकॉर्ड में की बड़ी हेराफेरी,जमीनों के नक्शे छुपा कर राजस्व रिकार्ड करने का बड़ा मामला हुआ उजागर

रायसेन।हाल ही में मध्यप्रदेश के रायसेन जिले नायब तहसीलदार टप्पा साँची के ग्राम शाहपुर के किसान अजहर उल्लाह की जमीन संबंधी मामला उलझा हुआ है।संबंधित किसान अजहर उल्लाह और उनके परिजनों द्वारा राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा को शिकायती आवेदन देकर इस जमीन संबंधित मामले को सुलझाने की गुहार लगाई है।उनकी जमीन के मामले में बंदोबस्त के नाम पर बदल दिए जमीनों के नक्शे और छुपा दिया पुराना राजस्व रिकॉर्ड तो कहीं खसरो में जमीन कम कर दी ।तो कहीं बढ़ा दी गई तो कहीं नक्शे ही बदल दिए गए।राजस्व के नक्शों में भी जगह बढ़ा दी ।तो कहीं कम कर दी ।कहीं तो पुराने रजिस्टर पर चिटें लगाकर राजस्व रिकॉर्ड ही बदल दिया और किसान का नाम ही गायब कर दिया !इतना ही नहीं कहीं तो रोड की जमीन अंदर कर दी घूस लेकर अंदर की जमीन रोड पर कर दी ! इस बड़ी गड़बड़ी को लेकर किसान परेशान हैं पर समस्या का सही निराकरण करने वाले जिम्मेदार अधिकारी नेता एवं संस्था कोई नहीं !
यह गड़बड़झाले की परेशानी अकेले किसान अजहर उल्लाह खान की नहीं बल्कि शाहपुर क्षेत्र के डेढ़ सौ से दो सौ किसान पटवारी राजस्व विभाग के राजस्व निरीक्षक नायब तहसीलदार की करतूत से सालों से चकरघिन्नी बने हुए हैं।लेकिन उनके इस जमीन संबंधी पेचीदे मामले की उलझन आसान नहीं हुई है।शाहपुर के किसान अजहर उल्लाह ने भू बन्दोबश्त,राजस्व रिकार्ड को ठीक करने कलेक्टर अरविंद दुबे, तत्कालीन एसएलआर विजय सराठिया को भी ज्ञापन दे चुके हैं।
प्रदेश के तेज तर्राट कार्यशैली के लिए मशहूर हो चुके मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के कैबिनेट मंत्री मण्डल में शामिल राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा को भी परेशान किसानों ने उनके भोपाल स्थित बंगले पर मुलाकात कर तमाम समस्याओं से ज्ञापन देकर अवगत कराया गया है।मंत्री वर्मा ने परेशान किसानों को उनकी बरसों पुरानी इस जमीन के मामलों को कलेक्टर अरविंद दुबे साँची राजस्व टप्पा नायब तहसीलदार नियति साहू से बातचीत कर जल्द ही सुलझाने का ठोस आश्वासन दिया है।
परेशान किसान और आमजनता बताती है कि वैसे रायसेन जिले में रिश्वतखोरी आम है।बगैर घूसखोरी लिए कोई भी अधिकारी काम करते नहीं हैं नहीं तो फाइल 3-3 साल दफ्तरों की पोटलियों में बंधे हुए धूल खाती रहती हैं।वरना इस गड़बड़ी की जांच तक नहीं होती ।कुछ राजस्व कर्मचारी अधिकारियों के गठजोड़ की वजह से से मिली भगत किसानों के केस की फाइल ही छुपा दी जाती हैं!
रायसेन जिला रिश्वतखोरी के मामलों में पहले से ही बदनाम है ।पिछले कुछ सालों में कई अधिकारी कर्मचारी सरेआम रिश्वत लेते रंगे हाथ लोक आयुक्त की कार्रवाई में रिश्वत लेते पकडे जा चुके हैं।लेकिन सूत्रों के हवाले से अब रिश्वत लेने के लिए प्राइवेट कर्मचारी भी रख लिए हैं प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर एवं साहब के ड्राइवर भी फाइल कोआगे बढ़ने से रुकवा देते हैं ।वह जिम्मेदार राजस्व अधिकारी से बोलकर जब घूस के लेनदेन होने की सेटिंग की जानकारी सभी को हो जाती है तो तब ही काम होता पाता है।वर्ना घूसखोरी की रकम दिए बगैर किसानों का पेंडिंग कार्य होना नामुमकिन है।संबंधितों को घूस नहीं मिली तो तो रटारटाया से जबाव दिया जाता है कि आपकी फाइल गुम हो गई है। फिर मौका देखकर प्रकरण की फाइल ही निरस्त कर देते हैं!
अब नायाब तरीका निकाला है किसानों पर अडीबाज़ी करने का ।उलझी जमीन की नापजोख करने का भू-स्वामी से ठेका ले लिया जाता है।जमीन पर मालिकाना हक के लिए कब्जा दिलाने का। जबकि भू- स्वामी वहां का ना तो किसान हो। ना ही वहां पर उसने खेतीबाड़ी की हो ।वहां की कभी उसका जमीन पर कब्जा भी ना रहा हो ।
राजस्व अधिकारी- कर्मचारी पहले जमीन खुद ही उलझाते हैं ।फिर जमीन खाली करवाने का नपती की तारीख से एक दिन पहले शाम को नोटिस देते हैं ।या फिर छुट्टी वाले दिन अचानक संबंधित किसानों को नोटिस देते हैं ।जमीन की नपती कराए जाने का। ताकि किसान अपने पक्ष की बात किसी से ना कह सके। किसान की बात को भी कोई सुनने वाला ना हो! इस गोरख धंधे के इस खेल में अडीबाज़ी कर कब्जा दिलवाने संबंधित थाने की पुलिस को भी बुलवाया जाता है। किसानों को धमकाया भी जाता है। ये सारा खेल राजस्व महकमे के अधिकारियों का होता है!
तहसीलदार ,रेवेन्यू इंस्पेक्टर और पटवारी के पास सेटिंग कर नापति करने का तो वक्त होता है। जमीन के राजस्व रिकॉर्ड एवं नक्शे सुधारने का जमीन के नक़्शे में राजस्व कर्मचारियों के द्वारा किए गए।जमीनों की हेराफेरी की जांच करने का पुराना नक्शा बहाल करने का आवेदन के जवाब देने का चल रहे केसों में जवाब लगाने का वक्त नहीं होता!
किसानों के नक्शों ,बन्दोबस्त रिकार्ड को ठीक कराने में महीनों गुजर जाते हैं ।राजस्व हल्का पटवारी से अपनी जमीन का सत्यापित नक्शा लेने में! पूरी सीटों के नक्शे सार्वजनिक होते हैं ।प्रशासन के भू-बन्दोबश्त विभाग रायसेन के द्वारा ।फिर भी किसान को नक़्शे नहीं दिए जाते।जब किसान की जमीन है तो पूरी सीट का नक्शा किसान के पास होगा तो कोई कर्मचारी नक्शों को कभी खुर्द बुर्द नहीं कर पाएगा।लेकिन पटवारी रेवेन्यू इंस्पेक्टर और तहसीलदार किसानों को घन चक्कर कर परेशान सालों करते रहते हैं! आखिर किसानो की समस्या कब दूर होगी कब मिलेगा इंसाफ।

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