मंगल ठाकुर
बरठीं (बिलासपुर ) । बेशकीमती वन संपदा को आग से बचाने के लिए अग्नि रक्षको की कमी की वजह से विधानसभा क्षेत्र झंडुत्ता के लगभग 50% जंगल आग की भेंट चढ़ चुके हैं जिस कारण लगभग 20 लाख का नुकसान सरकार का हो गया है। वनों को आग से बचाने के लिए फायर वॉचरों की संख्या बढ़ाने को लेकर सरकार और वन महकमा गंभीर नहीं है।
बिलासपुर की बात करें तो जिले के सात वन परिक्षेत्रों में 22 वन खंड हैं, जिनमें 72 वन बीटें हैं फायर वॉचरों की कमी ज्यादा गर्मी और लोगों की सहभागिता न होने के कारण लगभग 50% जंगलों में करोड़ों रुपए का नुकसान हो चुका है। गर्मियों के सीजन में अस्थायी तौर पर तैनात किए जाने वाले फायर वॉचर के लिए पर्याप्त बजट की कमी हर साल बनी रहती है। नतीजतन, जंगलों के दायरे के हिसाब से पर्याप्त संख्या में फायर वॉचर की तैनाती नहीं हो पाती। आग की दृष्टि से संवेदनशील वन बीटों में वनाग्नि की रोकथाम की जिम्मेदारी एक-एक फायर वॉचर के कंधे पर है। जो नाकाफ़ी है। जंगलों में फायर लाइन का कार्य भी न के बराबर है यदि विभाग सही तरीके से फायर लाइन पर काम करता है तो भी जंगलों में ज्यादा नुकसान होने से बचाया जा सकता है पेड़ों के साथ-सथ वन्य जीव भी आग की भेंट चढ़ जाते हैं जिस कारण कई प्रजातियां भी विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी हैं जिनको भी संरक्षण की आवश्यकता है अकेले वन परिक्षेत्र झंडूता के तहत 50% जंगल आग की भेंट चढ़ चुके हैं जिनमें तलाई झमराडीयां ढोली खाला डाहड़, समोह, बरवाड सहित श अन्य जंगलों में भी आग के कारण लाखों रुपए की वन संपदा स्वाहा हो चुकी है उधर वन परिक्षेत्र अधिकारी अशोक शर्मा व बनखंडाधिकारी ज्ञान चंद ने बताया की लोगों की कम सहभागिता व फायर वचनों की कमी के कारण जंगलों में अक्सर आग बढ़ जाती है उन्होंने कहा कुछ लोग घासनियों को साफ करने के लिए जानबूझकर आग लगाते हैं जो पूरे जंगल को स्वाहा कर देती है उन्होंने बताया वर्तमान में क्षेत्र में करीब 20 लाख रुपए का नुकसान वन संपदा का हुआ है जिसमें जंगली जीव जंतु भी शामिल हैं उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वह जंगलों को बचाने के लिए आगे आए ताकि पर्यावरण की सुंदरता व शुद्धता बनी रहे।