चंदौली: खेती के लिए नए-नए बदलाव किए जा रहे हैं। फसलों में पोषण के लिए नैनो यूरिया लिक्विड का उपयोग हो रहा। यह नाइट्रोजन तत्व की कमी को पूरा करने में सहायक है। इस बार गेहूं की फसल में किसानों ने इसका छिड़काव किया है। इससे उपज में बढ़ोतरी की उम्मीद है। यह लिक्विड दुकानों पर अन्नदाताओं को यह आसानी से मिल जा रहा। कृषि विभाग का प्राकृतिक व प्रदूषण मुक्त खेती पर जोर है।
खेतों की पैदावार में अहम भूमिका निभाने वाली नाइट्रोजन खाद के प्रयोग को लिक्विड फार्म में अमल लाने के लिए इफको की ओर से नैनो यूरिया पर जोर दिया गया है। दरअसल, फसलों में नाइट्रोजन तत्व की मात्रा की पूर्ति के लिए 46 फीसदी नाइट्रोजन वाली खाद का उपयोग किया जाता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता व उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है। अब इसकी जगह लिक्विड फार्म की आधा लीटर की बोतल नैनो यूरिया से गेहूं फसल पोषण मिल रहा। एक क्विटल की यूरिया की बोरी को फसल में डालने पर नाइट्रोजन तत्व की 46 किग्रा मात्रा पूरी होती है, जबकि इसे आधा लीटर की नैनो यूरिया की बोतल के छिड़काव से पूरा किया जा रहा। किसानों ने कहा कि यूरिया की एक बोरी 270 रुपये में मिलती है, जबकि नैनो यूरिया की आधा लीटर की बोतल का भाव 240 रुपये है। लागत में कम होने के साथ-साथ यूरिया में अतिरिक्त तत्वों में शामिल नाइट्रेट तत्वों के भूगर्भ में जाने से जल के प्रदूषित होने का खतरा नहीं है। मिट्टी की उर्वरा शक्ति इसके उपयोग से प्रभावित नहीं होगी।