बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल की रिपोर्ट
डीएवी कथारा में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती पर श्रद्धांजलि – सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी ने दिया सपने, संकल्प और मेहनत का मंत्र
बोकारो जिला के डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में भारत के पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती श्रद्धा और प्रेरणा के साथ मनाई गई। इस दौरान विद्यार्थियों को सपने देखने, संकल्प लेने और मेहनत से लक्ष्य प्राप्त करने का संदेश दिया गया डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में 15 अक्टूबर 2026 गुरुवार को प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक एवं ‘मिसाइल मैन’ डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जयंती श्रद्धा एवं प्रेरणा के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. कलाम के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि देने के साथ हुआ इसके पश्चात प्रार्थना सभा की नियमित गतिविधियों का संचालन किया गया। नवरात्रि के अवसर पर विद्यार्थियों ने सुमधुर स्वर में देवी स्तोत्र का सामूहिक गायन कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की विभिन्न सीसीए गतिविधियों में सहभागिता एवं उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। इससे विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन हुआ और उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने की प्रेरणा मिली इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य सह- झारखंड जोन-आई के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ. जी. एन. खान ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि यदि सूरज की तरह चमकना है, तो सूरज की तरह तपना होगा।*
डॉ.खान ने डॉ. कलाम के विचारों से प्रेरणा लेते हुए विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने, दृढ़ संकल्प के साथ अपने लक्ष्य निर्धारित करने तथा उन्हें प्राप्त करने के लिए निरंतर मेहनत करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि केवल सपने देखने से सफलता नहीं मिलती, बल्कि उन्हें साकार करने के लिए अनुशासन, धैर्य, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं।डॉ. कलाम का जीवन संघर्ष, सादगी, ज्ञान और अटूट इच्छाशक्ति का अनुपम उदाहरण है। अतः विद्यार्थियों को उनके जीवन को एक सीख के तौर पर अपनाना चाहिए।नवरात्रि एवं दशहरे के शुभ अवसर पर उन्होंने सभी को शुभकामनाएं प्रदान की एवं कहा कि अपने अंदर की बुराइयों को समाप्त कर सद्गुणों की दिव्य ज्योति प्रज्वलित करना ही सही अर्थों में नवरात्रि का उत्सव है।इस आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक पंकज कुमार, नागेंद्र प्रसाद, डॉ.आरएस मिश्रा, जितेंद्र दुबे, बीके दसौंधी, राकेश रंजन, रितेश कुमार,आराधना, रेखा कुमारी, वीणा कुमारी, मधुमल्लिका उपाध्याय, खुशबू सिंह,सुमन कुमारी, ओशीन, बबली कुमारी, अर्शिया एजाज, संगीत कुमार, विकास सिंह, जयप्रकाश गिरि, रीति कुमारी, अश्विनी कुमार, ओंकार मिश्रा सहित अन्य शिक्षकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।