श्रीमद भागवत कथा के दूसरे दिन अमृत मयी वाणी से कथा सुनकर श्रोता भक्ति के गोते लगाते रहे

बाँदा जनपद के बबेरु कस्बा के एक मैरिज हाल में श्रीमद भागवत कथा का आयोजन शिवशंकर गुप्त ने कराया। वही परीक्षित के रूप में शिवशंकर गुप्त के पिता हरिकृष्ण गुप्त उर्फ बड़कू, माता शांति गुप्ता रही। बृन्दावन के कथा वाचक पंडित श्याम नारायण पांडेय ने दूसरे दिन महात्म्य कथा एवं नारद संवाद अमृतमयी वाणी से सुनाया। कहा कि कलियुग में मच्छर के समान पाप है, जब मानव एक दूसरे को नोच कर खाने लगेंगे तब भगवान निश्चित रूप से अवतार लेंगे। भक्ति ज्ञान वैराग्य सुख की प्राप्ति कैसे हो, जीवन के समाधान का नाम है कथा। चित्रकूट धर्म औऱ न्याय की भूमि है, श्री राम का जन्म असुरों के बध एवं मर्यादा की स्थापना के लिए हुआ हुआ था। रामायण कहती है कि राम के आदर्श पर चलिए। कर्म ही हमारा जीवन है। परस्पर भाई को विवाद नही करना चाहिए बल्कि संवाद करना चाहिए।संगीत मयी कथा सुनकर श्रोता भक्ति में डूबे रहे। कथा समापन के बाद पूजन आरती की गई और सभी श्रोताओं को प्रसाद ग्रहण कराया गया है।

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