सचिव रेखा यादव एवं सभी न्यायिक अधिकारीगणों द्वारा संयुक्त रूप से विभिन्न विद्यालयों में ‘‘Transformative Tuesday‘, के अंतर्गत विषय “शोषण के खिलाफ़ आवाज़ उठाएँ, अपने शरीर और मन की रक्षा करें; ’गुड टच’ और ’बैड टच’ के बीच का फ़र्क समझें और सुरक्षित रहें” के संबंध में विधिक जागरुकता शिविर आयोजित कर बच्चों को यौन अपराधों के प्रति किया जागरुक

माननीय राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के पत्रांक रालसा/2026/8202-8245 दिनांक 01.04.2026 की अनूपालना में सम्पूर्ण राजस्थान राज्य में स्कूली छात्रों के लिए ‘‘Transformative Tuesday‘‘ नामक एक विशेष अभियान का शुभारंभ किया गया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किशोर छात्रों को उनके विधिक अधिकारो, कर्तव्यों और साइबर अपराध, बाल विवाह एवं नशे को ना हो, अपने सपनों को हां कहो नशा कोई स्टाइल नहींः अपने मन, शरीर और भविष्य की रक्षा करों एवं अगस्त माह के अंतर्गत विषय “शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाएँ, अपने शरीर और मन की रक्षा करें; ’गुड टच’ और ’बैड टच’ के बीच का फ़र्क समझें और सुरक्षित रहें” जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक-विधिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील बनाना है। जिसके क्रम में आज दिनांक 04.08.2026 को सचिव रेखा यादव एवं सभी न्यायिक अधिकारीगणों द्वारा विभिन्न विद्यालयों में ‘‘Transformative Tuesday‘, के अंतर्गत विषय “शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाएँ, अपने शरीर और मन की रक्षा करें; ’गुड टच’ और ’बैड टच’ के बीच का फ़र्क समझें और सुरक्षित रहें” के संबंध में विधिक जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें न्यायिक अधिकारीगणों ने विद्यालय में बच्चों को यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (POCSO Act] 2012, 2012) के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह अधिनियम 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अंतर्गत यौन उत्पीड़न, यौन हमला, गंभीर यौन हमला, अश्लील प्रदर्शन, ऑनलाइन शोषण तथा बच्चों से संबंधित अश्लील सामग्री जैसे अपराध दंडनीय हैं। इसमें धारा 7 एवं 8 के अंतर्गत यदि किसी बच्चे के गुप्तांगों को यौन उद्देश्य से छुआ जाता है या उसके साथ अनुचित शारीरिक स्पर्श किया जाता है, तो यह दंडनीय अपराध है साथ ही धारा 9 एवं 10 के अंतर्गत यदि अपराध परिवार के सदस्य, शिक्षक, अभिभावक, संरक्षक अथवा विश्वास की स्थिति में रहने वाले व्यक्ति द्वारा किया जाता है, तो इसे अधिक गंभीर अपराध माना जाता है साथ ही धारा 11 एवं 12 के अनुसार गंदी बातें करना, अश्लील इशारे करना, अश्लील फोटो या वीडियो मांगना, मोबाइल अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से यौन उत्पीड़न करना भी अपराध की श्रेणी में आता है। साथ ही किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि यह कानून उन बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित करता है जिन्हें देखभाल, संरक्षण, शिक्षा, उपचार या पुनर्वास की आवश्यकता है। इसके अंतर्गत अनाथ, परित्यक्त, बेघर, शोषित, बाल श्रमिक, बाल विवाह से प्रभावित तथा जोखिमग्रस्त बच्चों को संरक्षण प्रदान किया जाता है। साथ ही भारतीय न्याय संहिता, 2023 के महत्वपूर्ण प्रावधानों की भी जानकारी देते हुए बताया कि यह नई आपराधिक संहिता बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को अधिक प्रभावी बनाने पर बल देती है। बच्चों के विरुद्ध अपराध, शारीरिक हिंसा, धमकी, पीछा करना, अश्लील कृत्य, मानव तस्करी तथा डिजिटल माध्यम से किए जाने वाले अपराधों के विरुद्ध कठोर दंड का प्रावधान किया गया है साथ ही बच्चों को ‘गुड टच’ और ‘बैड टच’ के बीच का अंतर समझाया एवं बच्चों को बताया कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें असहज महसूस कराए, अनुचित तरीके से छुए, डराए-धमकाए या गलत बात छिपाने के लिए कहे, तो वे तुरंत अपने माता-पिता, शिक्षक, अभिभावक, परामर्शदाता, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस हेल्पलाइन नं. 100/112, महिला हेल्पलाइन नं. 181, नालसा टोल फ्री नं. 15100 पर संपर्क करें साथ ही स्कूली बच्चों को कोर्ट वाली दीदी के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर आप कोर्ट वाली दीदी पेटिका में अपनी एप्लीकेशन भेज सकते हो जिसका निस्तारण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, धौलपुर द्वारा किया जाएगा। ब्यूरो चीफ धौलपुर