शास्त्रीय और पारंपरिक नृत्य भारतीय संस्कृति और परंपरा की जीबन्त धरोहर है

शास्त्रीय और पारंपरिक नृत्य भारतीय संस्कृति और परंपरा की जीबन्त धरोहर है

 

ओड़िशा प्रदेश राउरकेला की प्रमुख सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था नृत्य मल्हार के आयोजन में राउरकेला के सिविक सेंटर में द्वितीय राज्य स्तरीय नृत्य महोत्सव 2026 का आयोजन किया गया।

राज्य भर से 1500 से अधिक नर्तकियों, उनके अभिभावकों और नृत्य प्रेमियों ने इस एक दिवसीय नृत्य महोत्सव में भाग लिया और इसे सफल बनाया। महोत्सव का उद्घाटन भगवान श्री जगन्नाथ को पुष्प अर्पित करके और अर्घ्य देकर किया गया। नृत्य महोत्सव की अध्यक्षता संस्था की अध्यक्ष, प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना, नृत्य शोधकर्ता और स्वर्ण पदक से सम्मानित सुश्री बर्षा रानी पांडा के अध्यक्षता में आयोजित हुआ । महोत्सव के दौरान नर्तकियों द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय और पारंपरिक नृत्य प्रदर्शनों का चयन ओडिशा के प्रसिद्ध कथक और लोक नृत्य गुरुओं ने किया | उस्ताद बिस्तिला खान पुरस्कार विजेता कलाकार सर्वेश्वर भोई विशेष अतिथि थे और उन्होंने नर्तकियों का उत्साहवर्धन किया। शास्त्रीय ओडिसी नृत्य और पारंपरिक लोक नृत्यों ने महोत्सव में दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस उत्सव में जिला संस्कृति एवं सूचना अधिकारी सुश्री नंदिनी मुंडारी प्रख्यात रंगमंच अभिनेता और निर्देशक प्रोफेसर डॉ. समर मुदाली की उपस्थिति से शोभा बढ़ी। शास्त्रीय एवं पारंपरिक नृत्य हमारी विरासत और परंपरा का जीवंत प्रतीक हैं। नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि हमारे भारतीय धर्म, संस्कृति और परंपरा का अभिन्न अंग भी है। उन्होंने कहा कि यह भक्ति, प्रेम, करुणा, त्याग, स्नेह और आनंद जैसी भावनाओं को जागृत करता है। बाद में, उत्सव में मनमोहक नृत्य प्रस्तुत करने वाले वरिष्ठ एवं युवा नर्तकों को महान कीर्ति सम्मान, लोक कला सम्मान और अपूर्ब कीर्ति सम्मान से सम्मानित किया गया। अतिथियों द्वारा संस्थान की एक स्मृति पत्रिका ‘शिखर’ का विमोचन किया गया। उत्सव का समन्वय अनिल कुमार मल्लिक और सुश्री ज्योस्ना रानी साहू ने किया। शिवशीष पात्रा, सुभा प्रयदर्शन पुरी,सुरंगी पात्रा, राजा लक्ष्मी दास स्नेहांजलि पांडा और संस्थान के सचिव अमन श्रीवास्तव भुया सहयोग दिया। अंत में, बर्षा रानी पांडा ने आभार व्यक्त किया, राउरकेला से आर9 भारत की रिपोर्ट

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