नदी प्रदूषण और अवैध भूजल दोहन की जांच के लिए NGT ने गठित की संयुक्त समिति
झारसुगुड़ा, 19 अगस्त: झारसुगुड़ा जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली इब नदी के प्रदूषण और अवैध भूजल दोहन के आरोपों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने गंभीर रुख अपनाया है। एनजीटी की पूर्वी क्षेत्र पीठ, कोलकाता ने मामले की सच्चाई की जांच के लिए एक संयुक्त समिति गठित कर एक महीने के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

यह मामला आवेदक दिगंबर भोई द्वारा एनजीटी में दायर किया गया था। याचिका में झारसुगुड़ा सदर प्रखंड के मराकुटा स्थित औद्योगिक इकाई ओडिशा मेटालिक्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ गंभीर पर्यावरणीय आरोप लगाए गए हैं।
याचिका के अनुसार, कंपनी द्वारा गर्मी के मौसम में 50 से अधिक हाई-पावर बोरवेल के माध्यम से कथित तौर पर बड़े पैमाने पर भूजल का दोहन किया जा रहा है। इसके अलावा वर्षा जल संचयन व्यवस्था का पर्याप्त उपयोग किए बिना इब नदी से अत्यधिक मात्रा में पानी उठाने का भी आरोप लगाया गया है। इससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह के साथ-साथ स्थानीय लोगों की जल आवश्यकताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पर्यावरणीय मंजूरी की शर्तों के तहत कॉरपोरेट एनवायरनमेंट रिस्पॉन्सिबिलिटी (CER) के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए जाने थे, लेकिन उक्त राशि खर्च नहीं की गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी की पीठ ने आरोपों की तथ्यात्मक जांच के निर्देश दिए। पीठ में न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी, विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल तथा ईश्वर सिंह शामिल हैं।
एनजीटी के निर्देश पर ओडिशा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और झारसुगुड़ा जिला कलेक्टर को शामिल करते हुए संयुक्त समिति गठित की गई है। समिति घटनास्थल का निरीक्षण करेगी और आवेदक तथा संबंधित औद्योगिक इकाई के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में निष्पक्ष जांच करेगी।
समिति को अपनी रिपोर्ट एक महीने के भीतर एनजीटी के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर संबंधित प्राधिकारी कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करेंगे। जांच की पूरी प्रक्रिया के लिए झारसुगुड़ा जिला कलेक्टर को नोडल एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
एनजीटी ने यह आदेश 10 अगस्त 2026 को पारित किया था, जबकि आदेश को 18 अगस्त को सार्वजनिक किया गया। इब नदी के संरक्षण तथा भूजल एवं नदी जल के उचित और सतत उपयोग की दृष्टि से एनजीटी का यह निर्देश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।झारसुगुड़ा से सुमित्रा देवी की रिपोर्ट, आर 9 भारत