सरकारी विद्यालयों की दयनीय स्थिति

सरकारी विद्यालयों की दयनीय स्थिति

बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बच्चों का भविष्य अंधकारमय होने की आशंका

राउरकेला, विद्यालय को ज्ञान का मंदिर कहा जाता है। इसी मंदिर से बच्चों को शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और अपने भविष्य को संवारने की प्रेरणा मिलती है। लेकिन जब विद्यालयों में ही बुनियादी सुविधाओं का अभाव हो, पर्याप्त कक्षाएं न हों, पेयजल की समस्या हो, शौचालय जर्जर हों और जल निकासी की उचित व्यवस्था न हो, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है। राउरकेला के मालगोदाम स्थित कल्याणी देवी सरकारी उच्च विद्यालय, बासंती कॉलोनी सरकारी उच्च प्राथमिक एवं उच्च विद्यालय तथा नुआगांव प्रखंड के मधुपुर सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थिति इसका उदाहरण है।
मालगोदाम स्कूल में 780 विद्यार्थी, पर्याप्त कक्षाओं का अभाव
वर्ष 1970 में स्थापित कल्याणी देवी सरकारी उच्च विद्यालय में पहली से दसवीं कक्षा तक करीब 780 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय में अब तक पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल की व्यवस्था नहीं हो सकी है। विद्यार्थियों को बोरिंग के पानी पर निर्भर रहना पड़ रहा है। वहीं नौवीं कक्षा में ही 117 विद्यार्थी हैं, लेकिन पर्याप्त कक्षाएं नहीं होने के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है। एक ही विषय को दो पीरियड में पढ़ाने की स्थिति बन रही है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
विद्यालय के शौचालयों की स्थिति भी चिंताजनक है। लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण फर्श उखड़ गया है। विद्यालय से सटे इलाके में पर्याप्त ड्रेनेज व्यवस्था नहीं होने से थोड़ी बारिश में ही परिसर जलमग्न हो जाता है। बारिश का पानी कक्षाओं और कार्यालय क्वार्टर में घुसने से पठन-पाठन बाधित होता है। इसके अलावा विद्यालय में ठंडे पेयजल की मशीन भी कई महीनों से खराब पड़ी है।
प्रधान शिक्षयित्री नमिता दाश ने बताया कि इन समस्याओं के संबंध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा विभागीय उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
स्मार्ट स्कूल पर खर्च, फिर भी छत से टपक रहा पानी
इसी तरह बासंती कॉलोनी सरकारी उच्च प्राथमिक एवं उच्च विद्यालय की स्थिति भी चिंताजनक है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में करीब 1 करोड़ 95 लाख रुपये की लागत से स्मार्ट स्कूल योजना के तहत स्मार्ट क्लासरूम, कार्यालय तथा आधुनिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था। लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद छत से बारिश का पानी टपकने लगा।
स्मार्ट शौचालय से जुड़े दो सेप्टिक टैंक भी खराब हो चुके हैं। इसके कारण विद्यार्थियों को शौचालय इस्तेमाल करने में परेशानी हो रही है और आसपास के क्षेत्रों का उपयोग करने की मजबूरी बन गई है। इससे विद्यालय परिसर में अस्वच्छ और दुर्गंधयुक्त वातावरण उत्पन्न हो रहा है।
प्रधान शिक्षयित्री कल्याणी बिश्वाल ने बताया कि विद्यालय की मरम्मत एवं समस्याओं के समाधान को लेकर राउरकेला महानगर निगम तथा निर्माण विभाग को लिखित रूप से अवगत कराया गया है। हालांकि अब तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। लगातार हो रही बारिश के कारण समस्या और गंभीर हो गई है।
मधुपुर स्कूल में एक कमरे में तीन-तीन कक्षाओं की पढ़ाई
नुआगांव प्रखंड के मधुपुर सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। विद्यालय में पहली से आठवीं कक्षा तक 60 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं, लेकिन पर्याप्त कक्षाओं का अभाव है। पहली, दूसरी और तीसरी कक्षा के बच्चों को एक ही कमरे में पढ़ाया जाता है। इसी तरह चौथी, पांचवीं और छठी कक्षा के विद्यार्थी भी एक ही कमरे में पढ़ने को मजबूर हैं। केवल सातवीं और आठवीं कक्षा के लिए अलग-अलग कमरे उपलब्ध हैं।
विद्यालय के पुराने भवनों की हालत भी जर्जर हो चुकी है। कई स्थानों पर छत से सरिया बाहर निकल आया है और कुछ हिस्सों की छत धंस चुकी है। ऐसे में विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नुआगांव की खंड शिक्षा अधिकारी सालेगमणि टुडू ने बताया कि मधुपुर विद्यालय के विकास एवं आवश्यक मरम्मत के संबंध में विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है। जल्द ही डीएसएफ अनुदान से आवश्यक विकास कार्य कराए जाएंगे।
ड्रेनेज की समस्या का समाधान होगा : आरएमसी आयुक्त
मालगोदाम और बासंती कॉलोनी हाईस्कूल से संबंधित समस्याओं पर आरएमसी आयुक्त दीना दस्तगीर ने कहा कि स्मार्ट स्कूल से जुड़े ड्रेनों की मरम्मत एवं पुनरुद्धार का कार्य आरएमसी द्वारा किया जाता है। हालांकि विद्यालय के अंदर ढांचागत मरम्मत के लिए आरएमसी की कोई योजना नहीं है। उन्होंने मालगोदाम स्कूल के ड्रेनेज की समस्या का समाधान किए जाने की बात कही।
स्मार्ट स्कूल के साथ बुनियादी सुविधाएं भी जरूरी
सरकारी विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराना निश्चित रूप से स्वागतयोग्य कदम है। लेकिन यदि इसके साथ पर्याप्त कक्षाएं, पेयजल, शौचालय, ड्रेनेज और सुरक्षित भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था नहीं होगी तो ‘स्मार्ट स्कूल’ की अवधारणा अधूरी रह जाएगी।
सरकारी विद्यालय गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के हजारों बच्चों के भविष्य निर्माण का प्रमुख आधार हैं। ऐसे में भवन के पूरी तरह जर्जर होने या बारिश के बाद जल निकासी की व्यवस्था करने का इंतजार करने के बजाय समस्याओं का स्थायी समाधान जरूरी है।
आज के विद्यार्थी ही कल के नागरिक हैं। उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। वरिष्ठ अधिवक्ता गिरीश चंद्र महापात्र, सदानंद साहू एवं बिरंचि पटनायक ने कहा कि विद्यालयों को केवल ‘ज्ञान का मंदिर’ कह देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन मंदिरों को सुरक्षित, स्वच्छ, व्यवस्थित और शिक्षण के अनुकूल बनाना भी सरकार एवं प्रशासन का दायित्व है। बुनियादी ढांचे में सुधार नहीं हुआ तो इसका सीधा असर आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर पड़ सकता है।राउरकेला से पंचानन पात्र की रिपोर्ट, R9 भारत

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