रूपाणाधाम और बांके बिहारी जनसुनवाई का आम आदमी पार्टी ने किया जमकर विरोध

आम आदमी पार्टी ने रूपाणाधाम और बांके बिहारी उद्योग विस्तार का जमकर विरोध किया। रायगढ़ जिले के ग्राम पंचायत सरायपाली में संचालित रूपाणाधाम स्टील प्लांट की प्रति वर्ष 120000 टन क्षमता है, जो अब बढ़कर 648000 टन प्रतिवर्ष प्रस्तावित है, जिसके लिए जनसुनवाई का आयोजन किया गया था, प्लांट से लगभग 12 किलोमीटर दूरी में जनसुनवाई का आयोजन करने पर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाये, उनका कहना था प्लांट स्थल के आसपास ही जनसुनवाई आयोजित करने के स्पष्ट निर्देश है, क्योंकि दूर में होने वाली जनसुनवाइयों में गांव के लोग नहीं पहुँच पाते।

सिरिल धृतलहरे ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि प्रभावित गावों में इस जनसुनवाई की सूचना तक ठीक तरह से नहीं दी गई, वहीं दूरी पर आयोजन के चलते कुछेक ग्रामीण ही यहां पहुंचे। प्लांट प्रबंधकों द्वारा सुनियोजित ढंग से अपने कर्मचारियों-अधिकारियों को ही इस सुनवाई में बड़ी संख्या में भेजा गया। इसके अलावा प्रभावित गांवों के पंच-सरपंचों को खिला-पिलाकर अपने पक्ष में कर जनसुनवाई सम्पन्न कराया गया। प्लांट के प्रस्तावित विस्तार का विरोध कर रहे आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इलाके की दुर्दशा की जानकारी देते हुए बताया कि प्लांट और खदानों के चलते यहां की सड़कें जर्जर हो गई हैं, लोग हादसों में मर रहे हैं और ग्रामीणों को रोजगार भी नहीं मिल रहा है। वहीं समर्थन दे रहे लोग केवल “प्लांट को मेरा समर्थन है” कहकर बैठते रहे, जिससे साफ़ नजर आ रहा था कि वे “लाये गए” लोग थे। रायगढ़ जिले में आए दिन औद्योगिकरण के विस्तार एवं कोयला खनन कोल वाशरी जैसी कंपनियों के नए निर्माण एवं विस्तार की हो रही जनसुनवाइयों से रायगढ़ जिले की जनता अब त्रस्त हो चुकी है, रायगढ़ की जनता और ज्यादा औद्योगिकरण एवं खनन के प्रदूषण की मार झेलने में सक्षम नहीं है।

जनसुनवाई का विरोध करते हुए सम्पत चौहान ने बताया कि इस क्षेत्र के लोगों को अपने जीवन यापन के लिए जंगलों से तेंदूपत्ता, महुआ, हर्रा, बहेड़ा, आमला जैसे उत्पाद प्रभावित होने के कारण रोजगार पर सीधा प्रभाव पड़ेगा, जिससे लोगों में रोजगार के लिए पलायन करना होगा। यह क्षेत्र पांचवी अनुसूची क्षेत्र है, जहां ग्रामसभा को विशेषाधिकार है कि ग्राम पंचायत के अंदर संचालित होने वाली गतिविधियों के लिए सबसे पहले ग्रामसभा से अनुमति लेनी होती है, परंतु कंपनी द्वारा किसी भी प्रकार से ग्राम सभा से आज पर्यंत तक किसी भी प्रकार की कोई अनुमति नहीं ली गई है, जो स्थानीय लोगों के भारत के संविधान का आर्टिकल 21 का सीधा-सीधा उल्लंघन है, इसलिए जनसुनवाई निरस्त होनी चाहिए।

युवा नेता आलोक स्वर्णकार ने अपनी बात रखते हुए कहा कि कंपनी द्वारा जो ईआईए नोटिफिकेशन बनाया गया है, इसमें परियोजना के प्रभावित क्षेत्र के 10 किलोमीटर क्षेत्र में पढ़ने वाले गांवों का अध्ययन नहीं किया गया है, जिसमें आगनबाडी में पढ़ने वाले बच्चे, प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे, मिडिल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे एवं क्षेत्र में पढ़ने वाले बच्चों पर जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण का होने वाले दुष्प्रभाव का किसी भी प्रकार का अध्ययन नहीं किया गया है, यह ईआईए नोटिफिकेशन रिपोर्ट पूर्ण रूप से फर्जी है, इसी ईआईए नोटिफिकेशन का राज्य सरकार एवं जिला प्रशासन पहले जांच करवाएं, इसके बाद जनसुनवाई की प्रक्रिया का विधि सम्मत पालन करें।

महिला नेत्री मनीषा गोंड़ जनसुनवाई का विरोध करते हुए बोली कि कंपनी द्वारा प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों को पूर्व में सीएसआर मत के तहत जो कार्य करने के लिए कहा गया था, आज पर्यंत तक कंपनी द्वारा प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों के अपने सीएसआर मद के तहत किसी भी प्रकार का कोई कार्य नहीं करवाया गया है, जिस क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर आक्रोश है, अगर किसी भी प्रकार की घटना दुर्घटना होती है, जिसकी जिम्मेदारी कंपनी एवं जिला प्रशासन की होगी, इसलिए आयोजित होने वाली जनसुनवाई का हम विरोध करते हैं। जहां पर यह कंपनी स्थापित है, वहां के आसपास के क्षेत्रों जंगल बहुल क्षेत्र हैं, जहां लोगों की आजीविका का मूल कृषि पशुधन वनोपज है, जो कंपनी के स्थापित होने से काफी ज्यादा प्रभावित हुआ है एवं अगर कंपनी को विस्तार की अनुमति दी जाती है, जिससे आसपास का पर्यावरणीय क्षेत्र काफी ज्यादा प्रभावित होगा, जिसका प्रभाव आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोगों पर पड़ेगा, इसलिए इस जनसुनवाई का हम विरोध करते हैं। इस जनसुनवाई के विरोध में आम आदमी पार्टी ने एक प्रतिनिधि मंडल की टीम बनायी थी, जिसमें मुख्य रूप से सिरिल धृतलहरे, आलोक स्वर्णकार, सम्पत चौहान, मनीषा गोंड़, बबली चौहान, देवेन्द्र नंदग्वाल, आरिफ खान, गंगाधर सिदार सहित दर्जनों की संख्या में कार्यकर्ता थे।

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