ब्यूरो रिपोर्ट पलामू
‘द इंडियन लेनिन बाबू जगदेव’ के प्रमोशन में पहुंचे परिजन, अविनाश देव ने बताया शोषितों की आवाज़
दुनिया में जहां भी शोषण के खिलाफ संघर्ष होगा, वहां बाबू जगदेव प्रसाद के विचार जीवित रहेंगे : अविनाश देव

मेदिनीनगर। अमर शहीद एवं सामाजिक न्याय के प्रखर योद्धा बिहार लेनिन बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन संघर्षों पर आधारित फिल्म ‘द इंडियन लेनिन बाबू जगदेव’ के प्रमोशन के सिलसिले में उनके परिवार के सदस्य एवं फिल्म से जुड़े लोग मेदिनीनगर पहुंचे। इस दौरान संत मरियम विद्यालय के चेयरमैन अविनाश देव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और बाबू जगदेव प्रसाद के विचारों तथा सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें शोषितों, वंचितों और पिछड़ों की आवाज़ बताया।
अविनाश देव ने कहा कि समाज में सत्ता और श्रेष्ठता की लालसा ने शोषण को जन्म दिया। इतिहास गवाह है कि जाति, धर्म, अंधविश्वास और पाखंड के नाम पर समाज के कमजोर वर्गों का लंबे समय तक उत्पीड़न किया गया। इसी गैर-बराबरी और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का बिगुल बाबू जगदेव प्रसाद ने फूंका और शोषित समाज को अधिकारों के लिए संगठित किया।
उन्होंने कहा कि फिल्म के रिलीज होने के बाद उन्होंने 29 मई को मोहन सिनेमा हॉल में इसका पहला शो देखा था। दर्शकों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया को देखते हुए 30 मई को भी लोगों के लिए सिनेमा हॉल बुक कराया गया। फिल्म और बाबू जगदेव प्रसाद के संघर्षों से प्रभावित होकर उनकी पुत्री मधु सिंह, पौत्र पीयूष तथा फिल्म के निर्माता-निर्देशक प्रेम कुमार विद्यार्थी उनके आवास पहुंचे, जहां अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ देकर उनका सम्मान किया गया।
अविनाश देव ने कहा कि मधु सिंह से मुलाकात के दौरान बाबू जगदेव प्रसाद के जीवन के कई अनछुए पहलुओं को जानने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि बाबू जगदेव की क्रांतिकारी विरासत आज भी जीवित है और उनके विचारों का कारवां आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बाबू जगदेव के प्रसिद्ध नारों ‘जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ तथा ‘सौ में नब्बे शोषित हैं, नब्बे भाग हमारा है’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक समाज में गैर-बराबरी, छुआछूत, अंधविश्वास, शोषण और अन्याय मौजूद रहेगा, तब तक बाबू जगदेव प्रसाद के विचार लोगों को संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा देते रहेंगे।