चित्रलेखा श्रीवास की रिपोर्ट
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वनांचल क्षेत्र में गुंजा एक तीर एक कमान, आदिवासी एक समान का नारा
अतिथियों का सम्मान आदिवासी परंपरा अनुसार सांकेतिक रूप से हाथ धुलाकर
आदिवासी संस्कृति तीज त्यौहार और परंपरा का हो संरक्षण-विधायक फूल सिंह राठिया
आदिवासी संस्कृति परंपरा का पालन करेंगे तभी संवैधानिक अधिकार का लाभ मिलेगा -दुबराज राठिया

करतला//वनांचल ग्राम करतला में विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी आपसी सद्भाव और उल्लास के साथ सर्व आदिवासी समाज के द्वारा विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री फूलसिंह राठिया जी विधायक रामपुर, अध्यक्षता श्रीमती फूलबाई राठिया सरपंच करतला,विशिष्ट अतिथि श्रीमती बीज मोती राठिया अध्यक्ष जनपद पंचायत कोरबा, श्रीमती रेणुका राठिया जिला पंचायत सदस्य क्र 01, समस्त BDC करतला कोरबा विकास खण्ड, समस्त सरपंच करतला कोरबा विकास खण्ड तथा सर्व आदिवासी समाज प्रमुखों की उपस्थिति में सम्पन्न हुई। कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी पुरखा शक्ति ठाकुर देव, बिरसा मुंडा, वीर नारायण सिंह, डा भीमराव अंबेडकर का पूजन कर किया गया। तत्पश्चात अतिथि देवो भव: के अंतर्गत समस्त अतिथियों का स्वागत राठिया महिला प्रकोष्ठ के सदस्यों द्वारा आदिवासी/वनांचल क्षेत्र के परंपरानुसार पैर धोकर (सांकेतिक रूप से हाथ धुलाकर), पीला गमछा से पगड़ी बांध कर, पीले चावल से तिलक लगाकर किया गया।
इसके पहले सर्व आदिवासी समाज के युवाओं के द्वारा स्वाभिमान रैली (मोटर साइकिल रैली) निकाल कर पूरा वनांचल क्षेत्र एक तीर एक कमान आदिवासी एक समान, जल जंगल जमीन की रक्षा कौन करेगा, हम करेंगे हम करेंगे जैसे नारे से गूंज उठा और आदिवासी समाज में जोश भर दिया। लगभग तीस किलोमीटर की स्वाभिमान रैली का करतला के बस स्टैंड में राठिया महिला प्रकोष्ठ और सर्व आदिवासी समाज के महिलाओं ने आरती उतार, तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया विधायक श्री फूल सिंह राठिया, समाज प्रमुखों, ने श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा महिला-पुरुष कर्मा पार्टी के द्वारा उत्साह पूर्वक स्वागत कर सद्भावना भवन लाया गया ।
कार्यक्रम के शुरुआती स्वागत भाषण देते हुए श्री दुबराज सिंह राठिया ने अतिथियों का ह् दर से स्वागत कर संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा 1994 के अधिवेशन में पारित तथा 9 अगस्त 1995 से नियमित रूप से पूरे विश्व में आदिवासी दिवस मनाये जाने की बात कही। उन्होंने संवैधानिक अधिकार की प्राप्ति के लिए आदिवासी बने रहने अर्थात आदिवासी संस्कृति, परंपरा, तीज त्यौहार, देवी-देवताओं को मानने की अपील की । विधायक श्री फूलसिंह राठिया ने सभा को संबोधित करते हुए आदिवासी परंपरा, संस्कृति के साथ प्राचीन काल में उपयोग की जाने वाली ढेंकी, तिरही, जैसे विलुप्त हो रही आदिवासी समाज के जीवन से जुड़े वस्तुओं को सहेज कर दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित करने कहा । सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आयोजन समिति को इस बेहतरीन और ऐतिहासिक कार्यक्रम के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि श्री दुर्गा प्रसाद राठिया ने भी संबोधित किया उन्होंने कहा कि इस आयोजन का विस्तार कर आदिवासी समाज के हर गांव में हो ताकि हर वर्ग इस दिवस के महत्ता को समझे । श्री अभिमन्यु राठिया ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आदिवासी समाज को एकजुटता के साथ यह कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ हर वर्ष मनाने की बात कही । कार्यक्रम को अगरिया समाज के पुजेरीराम ने भी संबोधित किया उन्होंने राज्य सरकार द्वारा एक ही मिसल में शामिल अगरिया और चोख जाति आदिवासी और पिछड़ावर्ग में शामिल करने पर चिंता जताई। कार्यक्रम के अंत में विशिष्ट अतिथि के आसंदी से बोलते हुए रेणुका राठिया ने आदिवासी समाज में एकता व भाईचारा कायम कर ऐसे ही संगठित हो चलने बात की । उनके शायराना अंदाज़ को लोगों ने खूब सराहा।
इस दौरान स्कूली बच्चों के द्वारा प्रस्तुत आदिवासी संस्कृति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम ने शमा बांध दिया और दर्शकों को समापन तक बैठने मजबूर कर दिया ।
कार्यक्रम के दौरान राठिया महिला प्रकोष्ठ ने बालिकाओं और महिलाओं का फुगड़ी, कुर्सी दौड़, पतरी सिलाई प्रतियोगिता का आयोजन कर लोगों का दिल जीत लिया । इनके द्वारा विलुप्त होता आदिवासी व्यंजन महुआ लाटा, घोरिया रोटी,थोपोर्री रोटी, अइरसा रोटी, गुलगुल भजिया, हिंरवा रोटी, गूझा और मीठा नमकीन चीला रोटी का प्रदर्शन किया गया जिसको अतिथियों ने चखकर स्वाद लिया और पूरी टीम को धन्यवाद दिया।
इस वर्ष राठिया महिला प्रकोष्ठ के द्वारा कुछ नया करने की जिद में आदिवासी वेशभूषा का प्रदर्शन भी किया गया जो तारीफ ए काबिल रही ।
कार्यक्रम के अंत में श्री मनमोहन सिंह राठिया ने पधारे अतिथियों का आभार व्यक्त किया और श्री देवेंद्र सिंह राठिया ने आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की समापन की घोषणा की । कार्यक्रम का सफल संचालन रामलाल राठिया खुंटाकुड़ा और दुबराज सिंह राठिया ने किया। इस अवसर पर राठिया समाज, अगरिया समाज, पैंकरा समाज, उरांव समाज, बिरहोर समाज के पदाधिकारी, बीज मोती राठिया, दीनानाथ राठिया, मुकेश राठिया, अंतराम राठिया, दुलार राठिया, घनश्याम राठिया, विनयसिंह राठिया, नुकेश राठिया, टिकेश्वर सिंह राठिया, कैलाश राम राठिया, तेजेश्वरी राठिया, विष्णु प्रसाद मंझवार, महेंद्र सिंह राठिया, छत्रपाल सिंह राठिया, गेवराजसिंह कंवर, जोतराम, राजाराम, छत्रपाल सिंह राठिया सहित अनेक जनप्रतिनिधि और समाज प्रमुख राठिया कंवर विकासशील समिति के यादनसिंह राठिया, करमसिंह राठिया, दुबराज सिंह राठिया, कुमार सिंह राठिया, नरेश्वर सिंह राठिया, सागर सिंह राठिया, रामलाल राठिया, निर्मल सिंह राठिया, सत्यपाल सिंह राठिया, चनेशराम राठिया,ऋषि राठिया, राठिया महिला प्रकोष्ठ के भावना राठिया, बिमला राठिया, त्रिवेणी राठिया, संतोषी राठिया, रामेश्वरी राठिया, नीरा राठिया, चन्द्रमा राठिया, चंद्रकांति राठिया,दीना राठिया,रजमोती राठिया, संतोषी राठिया, लीला राठिया,लीलिवती राठिया, शैल कुमारी राठिया, कपिला राठिया, कनक कंवर मंजूकंवर, मनियारो राठिया, नीतू राठिया, सहित बड़ी संख्या में महिला पुरुष और बच्चे उपस्थित थे ।