परोपकार के समान कोई पुण्य नहीं है – आचार्य पं तेजप्रकाश वशिष्ठ
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राजाखेड़ा क्षेत्र के गांव सामौर के बाबू महाराज मंदिर पर दिव्य और भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हुआ।जिसमें सैकड़ों की संख्या में कन्या और महिलाएं सिर पर कलश रखकर शोभायात्रा में शामिल हुईं।यात्रा में बैंड बाजों के साथ भजन कीर्तन और जयकारों से वहां का वातावरण भक्तिमय हो गया। जिसका Live प्रसारण ACHARYA VED VANI PANDIT यूट्यूब चैनल पर किया जा रहा है।कथा में आचार्य पं लघुकृष्ण जी महाराज (तेजप्रकाश वशिष्ठ) ने भागवत जी की महिमा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने भक्ति ज्ञान वैराग्य की कथा का वर्णन कर जीवन में नाम जप के द्वारा पापों से मुक्ति का उपाय बताया। आचार्य जी ने आत्मदेव के कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि जो मनुष्य के कर्म में लिखा हुआ है उसे कोई मिटा नहीं सकता।अच्छा चरित्र ही एक संस्कारवान व्यक्ति की पहचान है उन्होंने कहा कि परोपकार के समान कोई पुण्य नहीं है और परपीड़ा के समान कोई पाप नहीं है। महाराज जी ने बताया कि धुंधकारी के बुरे कर्मों का फल उसे प्रेतयोनि में भुगतना पड़ा।गौकर्ण को रात्रि में भयंकर स्वप्न हुआ जिसमें अपने भाई धुंधकारी की प्रेत योनि का आभास हुआ। उसकी मुक्ति के लिए गौकर्ण जी ने सात दिन तक बांस पर बिठाकर धुंधकारी को श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करवाई जिससे सात दिन की कथा में वह अंततः प्रेत योनि से छूटकर स्वर्ग को गया।जब हमारे जन्म जन्मांतर के पुण्य उदय होते हैं तब हमें श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है।यह भागवत श्री समस्त भक्तजन और समस्त जनता जनार्दन द्वारा बाबू महाराज सामौर में आयोजित की जा रही है जो 7 मई से 14 मई 2026 तक चलेगी। जिसमें यज्ञ के यज्ञाचार्य आचार्य पं श्री वेदप्रकाश वशिष्ठ जी ने गौरी गणेश जी और भागवत जी का पूजन कराकर कथा शुभारंभ किया ।हजारों की संख्या में श्रोताओं ने कथा को बड़े ही भाव विभोर होकर ध्यानपूर्वक सुना। परीक्षित और समस्त भक्तजनों की तरफ सभी भक्तजन सहयोग एवं कथा श्रवणार्थ सादर आमंत्रित हैं। क्योंकि यह कथा किसी व्यक्ति विशेष की ना होकर सभी भक्तजनों और श्रोताओं की है। ब्यूरो चीफ मनोज राघव धौलपुर