बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल की रिपोर्ट
कथारा क्षेत्र में कोयले के बड़े भंडार मिलने की संभावना, सीएमपीडीआई की ड्रिलिंग में शुरुआती सफलता।
बोकारो जिला के कथारा क्षेत्र के 4 नंबर सब स्टेशन के सामने सीएमपीडीआई मुख्यालय रांची द्वारा कराए जा रहे जियोलॉजिकल सर्वे की शुरुआती चरण में ही बड़ी सफलता मिलने की बात सामने आई है। यहां चल रही ड्रिलिंग के दौरान जमीन के अंदर बड़े पैमाने पर कोयले का सिम मिलने की संभावना प्रबल हो गई है। जानकारी के अनुसार, सीएमपीडीआई की तकनीकी टीम पिछले कुछ दिनों से कथारा क्षेत्र में भू-वैज्ञानिक सर्वे और ड्रिलिंग कार्य में जुटी हुई है। ड्रिलिंग कार्य के साइड इंचार्ज सोनू कुमार रवि ने बताया कि अब तक लगभग 180 मीटर की गहराई तक ड्रिलिंग की गई है, जहां करीब 60 मीटर मोटा कोयले का सिम मिला है। उन्होंने बताया कि यह शुरुआती परिणाम काफी उत्साहजनक हैं और इससे क्षेत्र में बड़े कोयला भंडार की संभावना मजबूत हुई है। सोनू कुमार रवि ने कहा कि फिलहाल ड्रिलिंग का कार्य प्रारंभिक चरण में है और टीम अभी 500 से 550 मीटर की गहराई तक ड्रिलिंग करेगी। उन्होंने बताया कि अभी केवल एक स्थान पर कार्य शुरू किया गया है, जहां सकारात्मक परिणाम मिले हैं। इसके बाद इसी क्षेत्र में तीन अन्य स्थानों पर भी ड्रिलिंग की जाएगी, ताकि पूरे इलाके के भूगर्भीय स्वरूप और कोयले की उपलब्धता का विस्तृत अध्ययन किया जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई कि कथारा क्षेत्र में भविष्य में बड़े पैमाने पर कोयले का भंडार सामने आ सकता है, जिससे सीसीएल और कोल उद्योग को नई संभावनाएं मिलेंगी। यदि सर्वे में व्यापक मात्रा में कोयला मिलने की पुष्टि होती है तो आने वाले समय में इस क्षेत्र में नई खदान परियोजनाओं की राह खुल सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ-साथ क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति मिलने की संभावना है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि क्षेत्र में नया कोयला भंडार विकसित होता है तो इससे कथारा और आसपास के इलाके में रोजगार, व्यवसाय और आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा। वहीं, सीएमपीडीआई की टीम लगातार भूगर्भीय आंकड़ों का अध्ययन कर रही है और ड्रिलिंग से प्राप्त नमूनों की जांच भी की जा रही है। इस पहल को कथारा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय बाद इस इलाके में इतने बड़े स्तर पर जियोलॉजिकल सर्वे का कार्य किया जा रहा है। अब लोगों की नजर आगामी ड्रिलिंग रिपोर्ट पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथारा की धरती के नीचे आखिर कितना बड़ा “काला खजाना” छिपा हुआ है।