चित्रलेखा श्रीवास की रिपोर्ट
मो.7440269778
“दमखांचा पंचायत में राशन के नाम पर खेल“पत्रकारों से गाली-गलौज… सरपंच-सचिव की दबंगई कैमरे में!”
करतला//कोरबा जिले के करतला विकासखंड के ग्राम पंचायत दमखांचा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने “सुशासन” के दावों की पोल खोलकर रख दी है।
यहां गरीबों का हक़—राशन—अब सुविधा नहीं, बल्कि संघर्ष बन चुका है

ग्रामीणों का आरोप है कि—
महीनों से शक्कर और चना नहीं मिला
चावल भी समय पर नहीं दिया जा रहा
पहले फिंगरप्रिंट लिया जाता है… और राशन कई दिन बाद दिया जाता है
सवाल ये है—क्या यही है सरकारी व्यवस्था?
क्या राशन वितरण अब मज़ाक बन गया है?
“कई बार आवेदन दिया… लेकिन आज तक राशन कार्ड नहीं बना…”
जब इन गड़बड़ियों की जानकारी लेने पत्रकार पहुंचे…
तो सरपंच और सचिव ने जवाब देने के बजाय…
गाली-गलौज शुरू कर दी!
महिला पत्रकार से भी बदसलूकी की गई!
इतना ही नहीं…
सचिव का कहना— “जो छापना है छाप लो… मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता!”
आखिर ये हिम्मत आ कहां से रही है?
किसके संरक्षण में चल रही है ये दबंगई?
क्या प्रशासन की चुप्पी ही इनको ताकत दे रही है?
ग्रामीणों ने ये भी आरोप लगाया कि सचिव शराब के नशे में पंचायत आता है…
और उसी हालत में काम करता है।
एक तरफ मुख्यमंत्री “सुशासन तिहार” की बात कर रहे हैं…
और दूसरी तरफ दमखांचा में गरीबों का हक़ कुचला जा रहा है!
अब सवाल सीधा है—
क्या जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी?
या फिर यूं ही चलता रहेगा भ्रष्टाचार का ये खेल?