नुनहेरा में भ्रष्टाचार और बदहाली चरम पर :
हॉस्पिटल, स्कूल और पटवार घर के सामने गंदगी का अंबार, करन परमार ने दी भूख हड़ताल की चेतावनीबजट का आधा से ज्यादा पैसा दलाली और रिश्वत की भेंट चढ़ा; सरपंच, सेक्रेटरी और पटवारी के घरों के चक्कर काटने को मजबूर ग्रामीण

धौलपुर (सैपऊ)।स्थानीय ग्राम पंचायत नुनहेरा में विकास के दावों की पोल पूरी तरह खुल चुकी है। क्षेत्र के सरकारी हॉस्पिटल, राजकीय स्कूल, पटवार घर और नौनिहालों के नंद घर के मुख्य द्वारों पर लंबे समय से कचरे का साम्राज्य फैला है, वहीं गांव की सभी सड़कें पूरी तरह कीचड़ से बदहाल हैं। इस बदहाली के बीच ग्रामीणों की सुध लेने पहुंचे युवा सामाजिक कार्यकर्ता करन परमार ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने प्रशासनिक तंत्र के साथ-साथ क्षेत्र के मूकदर्शक बने संपन्न और रसूखदार (जमींदार) वर्ग पर भी तीखे सवाल दागे हैं।लाखों के बजट के बाद भी बदहाली, दलाली और रिश्वतखोरी का बोलबाला करन परमार ने ग्राम पंचायत की दुर्दशा का असली कारण उजागर करते हुए सीधे आरोप लगाया कि सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए जो बजट जारी किया जाता है, उसके आधार पर धरातल पर काम नहीं हुआ है। ग्राम पंचायत को मिले सरकारी बजट का आधा से ज्यादा पैसा सीधे तौर पर दलाली और रिश्वतखोरी की भेंट चढ़ता दिख रहा है। कमीशनखोरी के इस खेल के कारण विकास कार्य सिर्फ कागजों तक सीमित हैं और इसी वजह से इस ग्राम पंचायत की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। *
निश्चित स्थान नहीं, सरपंच-सचिव और पटवारी के घर दौड़ रही जनता* परमार ने बताया कि यहाँ सरपंच, सेक्रेटरी (ग्राम विकास अधिकारी) और पटवारी के बैठने का कोई निश्चित स्थान या समय तय नहीं है। इस घोर लापरवाही के कारण गरीब ग्रामीणों को अपने छोटे-छोटे कागजी कामों और मूलभूत समस्याओं को लेकर इन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के घरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। पंचायत और पटवार भवन खाली पड़े रहते हैं और जनता उनके निजी आवासों पर दौड़ने को मजबूर है, जिससे एक हस्ताक्षर या प्रमाण पत्र जैसे मामूली कामों के लिए भी कई-कई दिन लग जाते हैं *।
भ्रष्टाचार से गरीबों का शोषण* करन परमार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि स्थानीय राजनेता, सरकारी अधिकारी और रसूखदार लोग आपस में मिलकर व्यापक भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। ये लोग गरीबों के हक को अपना बना लेते हैं, जिससे गांवों में विकास के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है। उन्होंने सवाल किया कि जिस रास्ते से मरीज, छात्र और गरीब जनता गुजरती है, वहां संक्रामक बीमारियों का खतरा फैला है, फिर भी जिम्मेदार मौन क्यों हैं
बजट की निष्पक्ष जांच हो, सामने आए दलाली की हकीकत: युवा समाजसेवी करन परमार ने उच्च अधिकारियों से विकास कार्यों के बजट की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। परमार ने कहा कि जांच होने से पंचायत के कामों में हुई दलाली और भ्रष्टाचार की असली हकीकत ग्रामीणों के सामने आ जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास बजट का आधा से अधिक पैसा सीधे तौर पर दलाली और रिश्वतखोरी की भेंट चढ़ रहा है, जिससे ग्राम पंचायत की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है।
भूख हड़ताल का अल्टीमेटम परमार ने चेतावनी दी है कि प्रशासन और रसूखदारों की साठगांठ के कारण हो रहे इस शोषण को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि उच्च प्रशासन ने भ्रष्टाचार व बजट की दलाली पर तुरंत नियंत्रण नहीं लगाया, सरपंच, सेक्रेटरी व पटवारी की पंचायत मुख्यालय पर नियमित उपस्थिति सुनिश्चित नहीं की, और सड़कों व सार्वजनिक स्थानों की स्थाई सफाई नहीं करवाई, तो वे पूरी ग्राम पंचायत के नागरिकों को साथ लेकर उग्र भूख हड़ताल शुरू करेंगे। संवाददाता ब्यूरो चीफ मनोज राघव राजाखेड़ा धौलपुर