कृषि कानूनों की वापसी से किसानों में हर्ष की लहर

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सीतापुर। केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए नए कृषि कानूनों को लेकर पूरे देश में किसानों के बीच जबरदस्त विरोध की लहर थी। इस विरोध को देखते हुए आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया के सामने आकर तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि लोगों को समझा नहीं पाए। तीनों कानूनों की वापसी की बात फैलते ही जहां एक तरफ किसानों के बीच हर्ष की लहर दौड़ गई, वही जनपद के अलग-अलग किसान नेताओं ने फैसले की वापसी को किसानों के संघर्ष की जीत बताते हुए अपनी टिप्पणियां मीडिया के साथ साझा की। किसान मंच के राष्ट्रीय सचिव शिव प्रकाश सिंह ने कहा कि सत्ता के नशे में चूर मोदी सरकार द्वारा,पारित तीनों काले कृषि कानूनों की वापसी,इस बात का प्रमाण है कि किसान आन्दोलन अपने जायज हकों के लिए था। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की जिम्मेदारी बनती है कि अपने तुगलकी फरमानों से आन्दोलन के लिए मजबूर किसानों में,शहीद हो चुके किसान भाइयों के परिवारों को पचास~पचास लाख मुवावजे की व्यवस्था के साथ परिवार में एक एक सरकारी नौकरी मुहय्या कराई जाए! संगतिन किसान मजदूर संगठन से ऋचा सिंह ने कहा कि किसान विरोधी यह कानून वापस नहीं लिया गया है बल्कि किसानों ने अपने संघर्षों से इसे वापस लेने के लिए सरकार को बाध्य किया है। सही मायने में यह किसानों की एक बड़ी जीत है।अभी एम एस पी पर कानून बनना बाकी है। गन्ना मूल्य और भुगतान की बात तय होनी है। पराली का मामला, 15 साल पुराने ट्रैक्टर, बिजली बिल, बीज बिल जैसे किसानों के ढेरों मुद्दे हैं। वह तय होने बाकी हैं। फिर भी सभी को बधाइयां ‌ किसानों ने साबित किया है कि सत्य की जीत होती है। किसान मंच की प्रदेश अध्यक्ष (महिला)
अल्पना सिंह ने कहा कि आज किसान आन्दोलन में एकजुटता,और किसानों की दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर,भाजपा सरकार को उसी के द्वारा थोपे गए कृषि विरोधी काले कानून वापस लेने पड़े हैं!भविष्य में सत्तारूढ़ दलों को सोंचना होगा की अब जागरूक हो चुके किसानों को गुमराह कर उनके शोषण के सभी मुद्दों पर इसी तरह के विरोध का सामना करना होगा! संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक पिंदर सिंह सिद्धू ने कहा कि किसानो का संघर्ष रंग लाया और विगत एक वर्ष से अपने हकों के लिए आंदोलन में शहीद हो चुके किसानों की शहादत व्यर्थ नहीं गई!आठ सौ किसानों की कुर्बानी ने सत्ताशीन अहंकारी मोदी सरकार को घुटनों के बल झुकने के लिए मजबूर कर दिया!अब भी एम एस पी कानून को अमलीजामा पहनाने और पराली आदि पर अमल होना शेष है!यदि एम एस पी कानून धरातल पर होता तो अपनी फसलों की बिक्री के लिए किसानों को दर दर भटकना न पड़ता! किसान नेता गुरुपाल सिंह ने कहा कि किसानों में खुशी की लहर है। किसान आन्दोलन में संयुक्त किसान मोर्चा की सफलता इस बात का प्रमाण कि कृषि विरोधी काले कानून हम किसानों पर जबरदस्ती थोपे गए थे!और मोदी सरकार ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। किसान नेता उमेश पाण्डे ने कहा कि अपनी मेहनत और किस्मत का मूल्यांकन हम सभी को करने का दायित्व स्वतंन्त्र भारत में स्वतंन्त्र नागरिक के नाम पर मिला है? फिर भी हम किसानों के विरोध में लोग पुरानी परिपाटी के सहारे शोषण करना चाहते हैं? परिणाम सभी की नजरों के सामने है।किसान मंच के मंडल प्रवक्ता दिनेश शुक्ला ने इसे किसानों की हक की लड़ाई में जीत बताते हुए कहा कि जनता पर जबरन थोपे गए हर फैसले का यही अंजाम होगा। जिला प्रभारी अंबुज श्रीवास्तव ने फैसला वापसी को 800 से ज्यादा शहीद हुए किसानों और लंबे समय से सड़कों पर बैठे किसानों की जीत बताया।