विनोद चड्ढा कुठेड़ा बिलासपुर
घुमारवीं उपमंडल की ग्राम पंचायत पनोह के गांव पनोह में उस समय वहां उपस्थित लोगो की आंखें नम हो गई जब 45 वर्षीय निर्मला देवी को उसकी दो बेटियों ने ना केवल अर्थी को कंधा लगाकर स्मशान घाट तक पहुंचाया बल्कि रोते बिलखते अपनी मां को मुखाग्नि भी दी । आज के समाज में जहां बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं है । वही इन मासूम बेटियों ने यह भी सिद्ध कर दिया कि वह ना केवल अपने मां-बाप की बेटियां हैं बल्कि बेटे बनकर भी अपनी जिम्मेदारी का समाज में निर्वहन भी कर सकते हैं । बताते चलें कि निर्मला देवी कुछ दिन पहले उस समय गंभीर रूप से घायल हो गई थी जब वह अपने पशुओं को चारा लाने के लिए खेत में गई हुई थी तथा उसका उपचार पीजीआई चंडीगढ़ में भी चला हुआ था लेकिन उसकी स्थिति की नाजुकता को देखते हुए उसे नेरचौक मेडिकल कॉलेज में दाखिल करवाया गया था जहां वह करीब 20 दिन से वेंटिलेटर पर ही थी । जैसे ही उसकी मौत की सूचना गांव में पहुंची तो गाँव मे मातम पसर गया तथा लोग उस परिवार को ढांढस बंधाने उसके घर दौड़ पडे । बताते चलें कि निर्मला देवी अति निर्धन परिवार से संबंध रखती तथा वह अपने पीछे 18वर्षीय व 20 वर्षीय बेटियों को तथा अपने पति जितेंद्र चंदेल को रोते बिलखते छोड़ गई । ग्राम पंचायत पनोह उप प्रधान बेसिरया राम संधू ने बताया कि उपरोक्त परिवार अति निर्धन व आई आर डीपी से है । परिवार की आय का साधन पालतू पशुओं को पालना व उन से निकाले गए दूध से आय अर्जित करना ही था तथा बीमारी के दौरान उन्हें अपने पशु मुफ्त में ही देने पड़े । जिसके चलते अब इस परिवार की आय का कोई भी साधन नही है । उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी बेटी एम बी ए व छोटी बेटी बीएससी की शिक्षा प्राप्त कर रही है । दुःख की इस घड़ी में कुछ समाजसेवी संस्थाओं ने भी उनका दुख साझा करने का प्रयास किया है । दरिद्र नारायण कल्याण समिति जो पूर्व पेंशनरों द्वारा संचालित की गई है उसके अध्यक्ष शहजाद चौहान व महासचिव जगदीश चंद् ने पहले भी इस परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की है तथा उन्होंने कहा कि वह भविष्य में भी इन दोनों बेटियों की शिक्षा दिलाने में अपना सहयोग करेंगी ।
