गुजरात के साबरकांठा जिल्ले के हिमतनगर दशहरा के दिन बहुत बडी संख्या मे सभी संगठन को ,के द्वारा,सभी जगा सहस्त्र पुजा करते हे
और छपरीया रामजी मंदिर से ढोल नगाड़े, और डीजे के साथ मे राम, लक्ष्मण और जानकी जी को रथ मे बीठा के सभी नाच गाने के साथ मे रावण जी को जलाने के लिए आगे बढ़ते हे ,अघर्म पर घर्म की जीत हो अंन्या पर न्याय की विजय बुरे पर अंच्छे की जय हो जय कार हो और धार संभ्य राजेन्द्र सिंह चावडा ने टावर चोकपे मंदिर, पे राम लक्ष्मण जानकी जी की पुजन अर्चना करके आरती कीया आगे बढे और रावण जी को आतस बाजी के साथ मे रावण का महा पुतला को जलाया जाता हे पर रावण तो ग्यानी था और शीव भंग्त था ऊसको हरसाल जलाते हे पर अभी जो इंन्सान को अंदर जो राक्षस बेठा हे और बेर और जहर इंर्षा एक दुसरे के ऊपर करते हे ना ओ राक्षस अपने अंदर जो बेठा ऊसको पहले जलाने की जरूरत हे ओ राक्षस को मारे गे तो अपना देश आगे बढे गा और ऐक दुसरे से मील के रहो ओ ही हमारे देश का ऊचीत मार्ग हे और सभी जगह पर हर साल रावण जी का पुतला दहन करते हे पर रावण जी सीता जी को उठा के लेके गये थे तो सीता जी को हाथ भी नही लगाया ,पर अभीतो हर जगह देश की बहेन बेटीओ को राक्षस बलात्कार करते हे ओही देश का राक्षस हे ,ऊस को जलाओ और अपने भीतर का राक्षस को जलाने की जरूरत हे
गुजरात सुरेखा सथवारा की रिपोर्ट
