बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल कि रिपोर्ट
जूनियर डीएवी परिसर में जर्जर मार्केट हटाने की मांग तेज, प्राचार्य ने सीसीएल प्रबंधन से की शीघ्र कार्रवाई की अपील।
बोकारो जिला क़े कथारा डीएवी पब्लिक स्कूल के प्राचार्य डॉ. जी.एन. खान ने सीसीएल कथारा प्रबंधन से जूनियर डीएवी स्कूल परिसर के अंदर स्थित जर्जर एवं खंडहरनुमा मार्केट को अविलंब हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि वर्षों से अनुपयोगी पड़ा यह भवन अब पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है तथा इसके आसपास घनी झाड़ियां और जंगल जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है, जिससे विद्यालय के विद्यार्थियों की सुरक्षा और शैक्षणिक गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। प्राचार्य डॉ. खान ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने वर्ष 2025 में ही कथारा क्षेत्र के महाप्रबंधक को लिखित आवेदन देकर उक्त भवन को ध्वस्त कराने का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि विद्यालय परिसर में स्थित यह जर्जर संरचना बच्चों के पठन-पाठन, खेलकूद एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में बाधा उत्पन्न कर रही है। साथ ही, भवन के खंडहर हो जाने के कारण किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की आशंका से भी इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि विद्यालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययन के लिए आते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि खंडहर भवन को हटाकर भूमि का समतलीकरण कर दिया जाता है तो विद्यालय को खेलकूद तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध हो सकेगा, जिससे विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। डॉ. खान ने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि सीसीएल प्रबंधन इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द आवश्यक कदम उठाएगा और खंडहरनुमा मार्केट को ध्वस्त कर परिसर को सुरक्षित एवं उपयोगी बनाएगा। इधर, कथारा क्षेत्र के महाप्रबंधक ए.के.वी. सिंह ने पूर्व में मीडिया से बातचीत के दौरान बताया था कि उक्त मार्केट के समतलीकरण के लिए रांची स्थित सीसीएल मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। उन्होंने कहा था कि मुख्यालय से स्वीकृति प्राप्त होते ही जूनियर डीएवी स्कूल परिसर में स्थित जर्जर मार्केट को हटाने तथा भूमि के समतलीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। स्थानीय अभिभावकों एवं क्षेत्र के लोगों का भी मानना है कि विद्यालय परिसर में खंडहरनुमा भवन का बने रहना बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से उचित नहीं है। अब सभी की निगाहें सीसीएल मुख्यालय से मिलने वाली स्वीकृति और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।