चित्रलेखा श्रीवास की रिपोर्ट
संगीत जीवन को संतुलित और संवेदनशील बनाने वाली साधना : विजय केडिया
“वियोगी होगा पहला कवि,
आह से उपजा होगा गान।
निकलकर आँखों से चुपचाप,
बही होगी कविता अनजान।”

बरपाली// श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर कलचुरी वैभव मंच के संयोजन में श्री रामलाल बघेल संगीत विद्यालय, बरपाली का स्थापना दिवस समारोह 4 सितंबर 2026 को मंच के संयोजक श्री रमेश महतो के आवासीय परिसर में गरिमामय एवं आत्मीय वातावरण में आयोजित किया गया। संगीत, भारतीय नृत्य और सांस्कृतिक परंपराओं से सजे इस आयोजन में क्षेत्र के सामाजिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र से जुड़े अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चैंबर ऑफ कॉमर्स, जिला जांजगीर-चांपा (अकलतरा) के अध्यक्ष श्री विजय केडिया थे। अध्यक्षता श्री बाबूलाल जायसवाल, उपाध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी, जांजगीर-चांपा एवं अध्यक्ष, स्थायी समिति, प्रगतिशील जायसवाल (कन्नौ) कलार समाज ने की। समारोह में वरिष्ठ समाजसेवी श्री दीनदयाल अग्रवाल अकलतरा, सेवानिवृत्त प्राचार्य श्री प्रह्लाद कुमार कौशिक तथा सुविख्यात तबला वादक एवं प्रशिक्षक श्री मोरध्वज वैष्णव सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे।
समारोह में श्री रामलाल बघेल संगीत विद्यालय के प्रशिक्षुओं, शिक्षकों एवं उनके परिवार के सदस्यों की उपस्थिति रही। विद्यालय के प्रशिक्षुओं द्वारा संगीत एवं भारतीय नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं। प्रस्तुतियों में विद्यार्थियों की तैयारी, अनुशासन और संगीत के प्रति समर्पण की झलक दिखाई दी।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण सुविख्यात तबला वादक एवं प्रशिक्षक श्री मोरध्वज वैष्णव की उपस्थिति रही। उनकी शिष्या द्वारा प्रस्तुत भारतीय नृत्य शैली ने दर्शकों की विशेष सराहना प्राप्त की। इसके बाद स्वयं मोरध्वज वैष्णव के एकल तबला वादन ने समारोह की सांगीतिक गरिमा को नई ऊंचाई प्रदान की। उनके वादन में लय और ताल की सुंदर संगति ने उपस्थित श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित किया।
समारोह में वरिष्ठ समाजसेवी श्री दुर्गा प्रसाद महतो का पुष्प, तिलक एवं चरण स्पर्श कर सम्मान किया गया। उनके सामाजिक योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उपस्थितजनों ने उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट की।
मुख्य अतिथि विजय केडिया ने अपने संबोधन में संगीत को जीवन को संतुलित एवं संवेदनशील बनाने वाली साधना बताया। उन्होंने कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सकारात्मकता और मानसिक संतुलन विकसित करने वाली प्रभावी विधा है। वर्तमान जीवन की भागदौड़, तनाव, अनिद्रा, मानसिक खालीपन और नैराश्य जैसी परिस्थितियों में संगीत व्यक्ति को आंतरिक शांति प्रदान कर सकता है।
उन्होंने संगीत शिक्षा में नियमित रियाज़, एकाग्रता, अनुशासन और निरंतर परिश्रम को आवश्यक बताते हुए विद्यार्थियों को साधना के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में जिस प्रकार सात रंगों को याद कराया जाता था, उसी प्रकार संगीत के सात स्वर—सा, रे, ग, म, प, ध, नि—भी विद्यार्थी जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं।
केडिया ने विद्यार्थी जीवन में प्रचलित “काक चेष्टा, बको ध्यानम्” जैसे सूत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगीत सीखने वाले विद्यार्थियों के लिए निरंतर अभ्यास, एकाग्रता और अनुशासन अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि संगीत की वास्तविक समझ केवल सुनने से नहीं बल्कि निरंतर साधना से विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि बढ़ती आयु के साथ संगीत के प्रति उनका लगाव और गहरा हुआ है। विभिन्न रागों पर आधारित संगीत सुनने के अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि संगीत जीवन के तनाव और एकाकीपन को कम करने का सशक्त माध्यम बन सकता है। उन्होंने श्री रामलाल बघेल संगीत विद्यालय के विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए संस्था के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
कार्यक्रम में वर्ष 1972 के शालेय सहपाठियों का आत्मीय मिलन भी विशेष रहा। विजय केडिया ने अपने बाल-सहपाठी एवं मित्र रमेश महतो के स्नेह एवं आत्मीयता का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे संबंध जीवन की अमूल्य पूंजी होते हैं। उन्होंने कलचुरी वैभव मंच द्वारा इस आयोजन के माध्यम से संगीत एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित किए जाने की सराहना की।
समारोह में श्री पुरी राम महतो, श्री महेंद्र महतो, श्री नारायण प्रसाद जायसवाल, तुलाराम, राजू, श्री कन्हैया लाल महतो, श्री मुरारी महतो, श्री मनोज महतो, आनंद, श्री संजय राजपूत, श्री गोविंद यादव, श्री ओमप्रकाश पारिख, श्रीमती दौलत बाई, अनूपा बाई एवं उनकी महिला साथी सहित सरस्वती शिशु मंदिर के स्टाफ एवं बच्चे तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण गणमान्यजन उपस्थित रहे।
अकलतरा से पंकज जोशी, लखन गुप्ता, रमेश माधवानी, गोपाल मंगलानी, जबकि कोरबा से प्रदीप चौहान एवं बजरंग शर्मा सहित माधो आदिले, विश्वेश्वर सिंह, देवराज सिंह, मूलचंद नामदेव, कन्हैया साहू एवं हुलास जायसवाल भी समारोह में उपस्थित रहे।
समारोह में उपस्थित अतिथियों एवं ग्रामीणजनों ने सांगीतिक प्रस्तुतियों की सराहना की। आयोजन के माध्यम से संगीत शिक्षा, भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं और स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का संदेश सामने आया। उपस्थितजनों ने कलचुरी वैभव मंच की इस पहल की सराहना करते हुए श्री रामलाल बघेल संगीत विद्यालय की निरंतर प्रगति एवं संगीत साधना के विस्तार की कामना की।