बोकारो से ब्यूरो अनिल बर्नवाल की रिपोर्ट
कथारा क्षेत्र में सीएमपीडीआई की ड्रिलिंग तेज, 11वें बोरहोल तक पहुंची टीम।
बोकारो जिला के कथारा क्षेत्र में कोयला भंडार का आकलन करने के लिए सीएमपीडीआई (सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट) की ओर से चलाया जा रहा भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण एवं ड्रिलिंग कार्य लगातार तेज हो रहा है। फिलहाल कथारा कारगिल माइंस के समीप ड्रिलिंग का काम चल रहा है। वहीं कार्य को निर्धारित समय में पूरा करने के उद्देश्य से सीएमपीडीआई ने तीन दिन पहले कारगिल क्षेत्र में एक और टीम को लगाया है। दोनों टीमों के लगातार प्रयास से अब तक 11वें बोरहोल तक ड्रिलिंग पहुंच चुकी है।
सीएमपीडीआई के क्षेत्र प्रभारी सोनू कुमार रवि ने बताया कि पिछले कुछ महीने से क्षेत्र में ड्रिलिंग का कार्य चल रहा है। पहले चरण में टीम ने सातवें बोरहोल तक कार्य पूरा किया था। इसके बाद कार्य का दायरा बढ़ने और काम अधिक लंबा होने के कारण सीएमपीडीआई की ओर से कारगिल क्षेत्र में एक अतिरिक्त टीम लगाई गई है। नई टीम का नेतृत्व बरकाकाना के राजवर्धन लाल और मनीष कुमार कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि नई टीम के साथ साइड इंचार्ज नरेश महतो, गोपाल राव, सुनील महतो और मनी टप्पो सहयोगी के रूप में कार्य कर रहे हैं। टीम के सदस्यों द्वारा लगातार कड़ी मेहनत करते हुए ड्रिलिंग का कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है और 11वें बोरहोल तक पहुंचने में सफलता मिली है।
उनके अनुसार, अब तक जिन स्थानों पर ड्रिलिंग की गई है, वहां पत्थर और मिट्टी की विभिन्न परतों के अलावा कोयले की मौजूदगी भी पाई गई है। इससे क्षेत्र में कोयला भंडार होने के संकेत मिले हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट रूप से बताना संभव नहीं है कि यहां कितना कोयला उपलब्ध है। ड्रिलिंग से प्राप्त कोर सैंपलों की जांच और तकनीकी विश्लेषण के बाद ही कोयले की मात्रा, गुणवत्ता, मोटाई और गहराई के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल यह भी तय नहीं है कि सीएमपीडीआई का ड्रिलिंग कार्य कब तक चलेगा। सर्वेक्षण के दौरान मिलने वाले भूगर्भीय आंकड़ों के आधार पर आगे के स्थानों पर ड्रिलिंग की जाएगी। क्षेत्र में कोयले की मौजूदगी मिलने से सर्वेक्षण कार्य को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सीएमपीडीआई की टीमों द्वारा अलग-अलग स्थानों पर की जा रही ड्रिलिंग से आने वाले समय में कथारा क्षेत्र के कोयला भंडार की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद तैयार होने वाली तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर ही क्षेत्र में भविष्य की खनन संभावनाओं को लेकर तस्वीर स्पष्ट होगी।