तालाब का सौंदर्य करण बनने से पहले ही हुआ धराशाई
लगातार शिकायतों के बाद पालिका के अधिकारियों ने नहीं ली सुध, पालिका के अधिकारी भी सवालों के घेरे में,,,,,
मामूली बारिश भी नहीं झेल पाया सवा दो करोड़ का सौंदर्याकरण
राजाखेड़ा/ राजाखेड़ा नगर पालिका क्षेत्र में वार्ड नं 12 स्थित तालाब मछला की पार का सौदर्याकरण पूरा होने से पहले ही लगातार विवादों के साए में आ रहा है।
मामूली बारिश ने तालाब की दीवार से पहले किनारे जमींदोज हो गए। जिससे पालिका के अधिकारियों के निर्माण कौशल पर तो सवाल खड़े हो ही ही गए, वहीं नागरिकों में भी आक्रोश फैल गया। गौरतलब है कि इस कार्य के निर्माण के साथ ही गंभीर आरोपों के साथ स्थानीय लोग लगातार शिकायतें कर रहे थे, लेकिन पालिका प्रशासन ने न इनकी जांच की न ही कार्रवाई। जिसके चलते यह निर्माण पहली मामूली बारिश में ही जमींदोज होना आरम्भ हो गया
सवा दो करोड़ से अधिक की लागत,,,,
राजाखेड़ा का रियासतकालीन
जल निष्क्रमण और संरक्षण तंत्र प्राचीन अभियत्रिकी की मिसाल माना जाता था, लेकिन प्रभावशालियों के संरक्षण में चारों तरफ अतिक्रमणों की बाढ़ जिसके कारण विशाल तालाब छोटे से गड्ढे के रूप में सिमट कर रह गया तालाव पर हुए अतिक्रमणों ओर बाद में इनके राजनीतिक कारणों से अतिक्रमणों कोनियमित कर दिए जाने से यह पूरातालाव पूरी तरहखत्म हो चुका था। जो विशाल तालाब छोटे गड्ढों में सिमट कर रह गया था उनको सौदर्याकरण कर उन्हें तालाब ओर पार्क बना कर पिकनिक स्पॉट बनाने के लिए मछला की पार तालाब के लिए सवा दो करोड़ से अधिक का कार्य स्वीकृत किया गया था।
जो अब पूर्ण होने वाला है, लेकिन पालिका में लगातार शिकायतों के बाद भी इस महत्वाकांक्षी कार्य का उचित
गुणवत्तापूर्ण निर्माण नहीं करा सके। नतीजतन यह पूरा होने से पहले ही ध्वस्त होने लगा ऐसे में इस कार्य पर खर्च की जा रही बड़ी राशि के औचित्य पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं अमृत सरोवर योजना मै प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षा भी धूमिल हो रही है।
तालाब की सौंदर्यकरण करनें मैं अनियमितताओं की शिकायत मिली है जिसकी जांच में स्वयं ही करूंगी
दीप्ति देव, तहसीलदार एवं अधिशासी अधिकारी नगर पालिका राजाखेड़ा
ब्यूरो चीफ धौलपुर